ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के आउटसोर्स कर्मचारियों ने 31 जुलाई को जारी आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि नए आदेश से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है, जिससे उनकी नौकरी और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे। बैठक के दौरान कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्राधिकरण के ओएसडी से मुलाकात की और स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। ओएसडी ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार करते हुए सोमवार तक लिखित रूप में समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय तक संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
कर्मचारियों के अनुसार, लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। बैठक में कर्मचारियों ने मांग रखी कि 31 जुलाई को जारी आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए और जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उन्हें दोबारा सेवा में लिया जाए। इसके साथ ही सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को पहचान पत्र, मेडिकल सुविधा और बीमा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि तकनीकी सुपरवाइजरों को केवल जिम्मेदारियां ही नहीं बल्कि आवश्यक प्रशासनिक अधिकार भी दिए जाएं ताकि कार्य संचालन बेहतर तरीके से हो सके। इसके अलावा उन्होंने नोएडा प्राधिकरण की तर्ज पर प्रत्येक छह महीने में वेतन वृद्धि लागू करने की मांग दोहराई। कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बैठक के बाद कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं मिलता है तो मंगलवार से लगभग 4,000 आउटसोर्स कर्मचारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। अब सभी की निगाहें सोमवार को प्राधिकरण प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। यदि प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनाता है तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में कार्य प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में यह मामला प्रशासन और कर्मचारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है, क्योंकि किसी भी बड़े आंदोलन का असर प्राधिकरण की विभिन्न सेवाओं और विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।