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शारदा विश्वविद्यालय में AAS तकनीक पर प्रशिक्षण, छात्रों ने सीखे खाद्य, फार्मा और क्लिनिकल विश्लेषण के गुर
शारदा विश्वविद्यालय की सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) की ओर से परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) पर एक दिवसीय गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- sakshi choudhary
- 09 Sep, 2026
शारदा विश्वविद्यालय की सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) की ओर से परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS) पर एक दिवसीय गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का विषय ‘परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी: खाद्य, फार्मा एवं क्लिनिकल विश्लेषण’ रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और AAS तकनीक के जरिए तत्वीय विश्लेषण के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझा। प्रशिक्षण के दौरान रक्त, खाद्य पदार्थ, कच्चे जल और पेयजल जैसे वास्तविक नमूनों का विश्लेषण किया गया। प्रतिभागियों को जैविक, खाद्य और पर्यावरणीय नमूनों में भारी धातुओं तथा आवश्यक खनिज तत्वों की पहचान और मात्रा निर्धारित करने में उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) भुवनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में नमूना तैयार करने, इंस्ट्रूमेंटल एनालिसिस और AAS के माध्यम से क्लिनिकल, खाद्य एवं पानी के नमूनों में विभिन्न तत्वों की मात्रा निर्धारित करने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्रों को प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों को समझने और उनके वास्तविक अनुप्रयोगों से परिचित कराने में मदद करता है। वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) सिबराम खारा ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण विद्यार्थियों को उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन और उनके वास्तविक जीवन में उपयोग को समझने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि AAS जैसी तकनीकें खाद्य, फार्मास्यूटिकल, क्लिनिकल और पर्यावरणीय नमूनों के विश्लेषण में उपयोगी हैं तथा इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को उद्योग और शोध के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायक हैं।
कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) के प्रमुख डॉ. अतुल कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि डॉ. अफसर अली ने कार्यक्रम के समन्वयक की भूमिका निभाई। प्रशिक्षण में देश-विदेश के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और परमाणु अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी की तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी हासिल की। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा, पेयजल की गुणवत्ता, पोषण संबंधी विश्लेषण और क्लिनिकल डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों की उपयोगिता समझने का अवसर मिला। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पहल छात्रों के अनुसंधान और तकनीकी कौशल को मजबूत करने के साथ उन्हें उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।