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दिल्ली में गंभीर हुआ वायु प्रदूषण, 22 केंद्रों पर AQI 400 पार; 6 से 8 नवंबर तक और बिगड़ सकती है हवा
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी में जहरीली धुंध का असर अब कई इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है।
- sakshi choudhary
- 05 Nov, 2026
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी में जहरीली धुंध का असर अब कई इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो पिछले 288 दिनों में सबसे खराब स्तर था। इस दौरान दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 22 पर AQI 400 के पार पहुंच गया और हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के पूर्वानुमान के मुताबिक, 6 से 8 नवंबर के बीच भी प्रदूषण गंभीर श्रेणी में रह सकता है। ऐसे में दीपावली से पहले राजधानी के लोगों की सांसों पर प्रदूषण का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
IIT दिल्ली और जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति
प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में देखने को मिला। 4 नवंबर को IIT दिल्ली में AQI 458 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में यह 448 रहा। मुंडका में AQI 439 तक पहुंच गया। वहीं 5 नवंबर की सुबह CPCB के आंकड़ों के अनुसार पंजाबी बाग में AQI 446, नरेला में 434, रोहिणी में 431 और आरके पुरम में 416 दर्ज किया गया। बवाना, नॉर्थ कैंपस और पटपड़गंज में भी हवा गंभीर श्रेणी में रही। CPCB के मानकों के अनुसार 301 से 400 के बीच AQI को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। गंभीर श्रेणी में प्रदूषण का असर स्वस्थ लोगों पर भी पड़ सकता है, जबकि पहले से सांस और दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा अधिक होता है।
पराली का धुआं, वाहन और धूल बढ़ा रहे प्रदूषण
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल, सड़कों की धूल और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं शामिल हैं। IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आकलन के मुताबिक 4 नवंबर को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 20.2 प्रतिशत और परिवहन क्षेत्र का योगदान 15.5 प्रतिशत था। इसके अलावा हवा की कम गति और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो रहे हैं। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम ने 6 से 8 नवंबर तक हवा गंभीर श्रेणी में रहने और उसके बाद भी अगले छह दिनों तक बहुत खराब से गंभीर श्रेणी के बीच बने रहने की आशंका जताई है।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण के अधिक स्तर पर बाहर लंबे समय तक रहने और खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए। आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। दिल्ली की बिगड़ती हवा का असर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद सहित पूरे एनसीआर पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और मौसम की स्थिति पर लोगों की नजर बनी रहेगी।