Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Sonia Gandhi: सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट विवाद पर BJP का हमला! 1980 में नाम जुड़ने पर उठाए सवाल

Sonia Gandhi: Congress बनाम BJP के बीच जारी राजनीतिक टकराव में अब बीजेपी ने सोनिया गांधी को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी का नाम voter list में साल 1980 में जुड़ गया था, जबकि वह उस समय तक भारतीय नागरिक (Indian citizen) नहीं थीं और इटली की नागरिकता रखती थीं।
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Sonia Gandhi: Congress बनाम BJP के बीच जारी राजनीतिक टकराव में अब बीजेपी ने सोनिया गांधी को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी का नाम voter list में साल 1980 में जुड़ गया था, जबकि वह उस समय तक भारतीय नागरिक (Indian citizen) नहीं थीं और इटली की नागरिकता रखती थीं। बीजेपी नेता Anurag Thakur ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस “appeasement politics” के तहत ghuspaithi voters का सहारा लेकर चुनाव जीतती है। उन्होंने Raebareli, Diamond Harbour और Kannauj जैसी सीटों पर duplicate voters और fake addresses के उदाहरण दिए।


Sonia Gandhi: मालवीय ने सोनीया गाँधी पर किया ये दावा 

मालवीय ने दावा किया कि 1 सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सरकारी आवास के मतदाता सूची में 1980 में सोनिया गांधी का नाम जोड़ा गया, जबकि तब तक वहां सिर्फ इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी और मेनका गांधी वोटर थे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट violation of electoral law था, क्योंकि भारत में वोट डालने के लिए नागरिकता अनिवार्य है। आरोप के मुताबिक, 1982 में नाम हटाया गया लेकिन 1983 में फिर जोड़ा गया, वह भी नागरिकता मिलने से पहले। इस पर कांग्रेस सांसद Tariq Anwar ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सोनिया गांधी की नहीं, बल्कि Election Commission की जिम्मेदारी बनती है।


चुनाव आयोग पर चल रहे विवाद के बाद सामने आई ये बात 

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राहुल गांधी ने हाल ही में Special Intensive Revision (SIR) और चुनावी सूची में “one crore mystery voters” जैसी अनियमितताओं के सबूत पेश करने का दावा किया था। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में fake voters, CCTV footage नष्ट करने और डेटा साझा न करने के आरोप लगाए थे। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से इन सबूतों को शपथपूर्वक सौंपने को कहा है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि आयोग को खुद अपने रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। यह मुद्दा अब चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है, जिससे दोनों दलों के बीच तनातनी और बढ़ गई है।