अमित शाह ने किया नए Constitutional Amendment Bills का बचाव, कहा- राजनीति में लाएंगे Moral Accountability

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Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए गए संवैधानिक संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) का जोरदार बचाव किया। शाह ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य राजनीति में moral accountability और पारदर्शिता लाना है। उन्होंने अपने ऊपर लगे 2010 के सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले का जिक्र करते हुए बताया कि वह गिरफ्तारी से पहले ही पद से इस्तीफा दे चुके थे और बाद में अदालत से बरी हुए। शाह का कहना था कि संविधान निर्माताओं ने कभी यह नहीं सोचा था कि कोई नेता जेल से ही सरकार चलाने की कोशिश करेगा।


Amit Shah: अगर 30 दिन के अंदर नही मिली बेल तो चली जाएगी कुर्सी 

नए प्रावधानों के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री arrest होने के बाद 30 दिनों में bail नहीं ले पाता, तो उसका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। हालांकि, जमानत मिलने पर वह फिर से पद संभाल सकता है। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसका इतिहास नेताओं को बचाने और सत्ता से चिपके रहने का रहा है, जबकि भाजपा अपने नेताओं को भी कानून के दायरे में लाने का काम करती है। उन्होंने इंदिरा गांधी के समय किए गए 39वें संशोधन (39th Amendment) का जिक्र किया, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री को न्यायिक जांच से छूट दी थी।


विधेयक के विरोध में निकले विपक्ष के सुर, ओवैसी सहित इन नेताओं ने कही ये बड़ी बात 

दूसरी ओर, विपक्ष ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “Hitler जैसी राजनीति” करार दिया, वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि इस प्रावधान का दुरुपयोग कर राज्यों की सरकारें गिराई जा सकती हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम “कठोर” और “संविधान विरोधी” है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और तमिलनाडु के मंत्री V. Senthil Balaji जेल में रहते हुए भी पद पर बने रहे। कुल मिलाकर, जहां सरकार इसे नैतिकता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष को इसमें राजनीतिक दुरुपयोग की आशंका नजर आ रही है।

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