Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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यूपी के आबकारी निर्यात में 45.4फीसदी का उछाल, 127.8 लाख डॉलर तक पहुंचा निर्यात

उत्तर प्रदेश की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 के बाद प्रदेश के आबकारी निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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उत्तर प्रदेश की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 के बाद प्रदेश के आबकारी निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान यूपी के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 45.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान देश का कुल आबकारी निर्यात करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 127.8 लाख डॉलर रही। पिछले वर्ष इसी अवधि में यूपी का निर्यात 87.9 लाख डॉलर था। इस तरह प्रदेश के निर्यात में करीब 39.9 लाख डॉलर की बढ़ोतरी हुई और राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। इस अवधि में यूपी महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर रहा।


निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश में नई औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है, जबकि एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। वहीं रैडिको खेतान अन्य राज्यों से निर्यात उत्पादन को सीतापुर और रामपुर स्थित संयंत्रों में स्थानांतरित कर रही है। आबकारी निर्यात नीति 2026-29 में उत्पादन, निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

आबकारी निर्यात का असर कृषि और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। यह राशि अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण ऊपर बताए गए निर्यात आंकड़ों से अतिरिक्त है। वहीं अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है। आबकारी विभाग के अनुसार निर्यात बढ़ने से गन्ने, शीरे और अनाज से लेकर कांच की बोतल, ढक्कन, लेबलिंग, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।