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ओवैसी का सरकार पर हमला, CEC की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग; SIR पर भी उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
- sakshi choudhary
- 12 Oct, 2026
AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। 12 अक्टूबर 2026 को दिए बयान में ओवैसी ने इस कानून को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में केंद्र सरकार के पास चयन प्रक्रिया में अधिक प्रभाव है, जिससे Election Commission की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इस प्रक्रिया को बंद करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। ओवैसी ने बिहार में हुई SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर पहले भी सवाल उठाए गए थे। उन्होंने चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए समिति बनाने की मांग की। हालांकि, SIR को लेकर लगाए गए आरोप ओवैसी के राजनीतिक बयान हैं; इन्हें चुनावी अनियमितताओं का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को लेकर मामला न्यायिक विचार के दायरे में भी है। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजने के सवाल पर अलग-अलग राय दी थी। वहीं, अक्टूबर में शीर्ष अदालत ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा। ऐसे में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है।