Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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UP TGT Recruitment 2026: 17, 735 पदों के आरक्षण पर विवाद, OBC-SC-ST को कम सीटें मिलने के आरोप पर आयोग ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश में टीजीटी भर्ती 2026 के तहत 17,735 पदों पर होने वाली भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि OBC, SC और ST वर्ग को निर्धारित आरक्षण के मुकाबले कम पद मिले हैं, जबकि EWS वर्ग को ज्यादा रिक्तियां दी गई हैं।
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उत्तर प्रदेश में टीजीटी भर्ती 2026 के तहत 17,735 पदों पर होने वाली भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि OBC, SC और ST वर्ग को निर्धारित आरक्षण के मुकाबले कम पद मिले हैं, जबकि EWS वर्ग को ज्यादा रिक्तियां दी गई हैं। इन आरोपों के बीच उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को स्पष्टीकरण जारी कर अभ्यर्थियों से भ्रामक जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।

आयोग का कहना है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आरक्षण का निर्धारण सभी स्कूलों के कुल पदों को एक साथ जोड़कर नहीं, बल्कि विद्यालयवार और लागू नियमों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में कुल 17,735 पदों में अलग-अलग वर्गों की हिस्सेदारी देखकर सीधे आरक्षण नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। आइए समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है और आयोग ने अपनी सफाई में क्या कहा है।


यूपी टीजीटी भर्ती में 17,735 पदों का गणित क्या है?

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायक अध्यापक यानी TGT भर्ती 2026 के लिए 23 अक्टूबर को विज्ञापन जारी किया था। इसमें कुल 17,735 पदों को शामिल किया गया है। इसके बाद भर्ती में आरक्षण के बंटवारे को लेकर सवाल उठने लगे।

वायरल दावों में विज्ञापित पदों की संख्या और आरक्षण के सामान्य प्रतिशत की तुलना की जा रही है। सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्गवार पदों का विवरण इस प्रकार है:

श्रेणीविज्ञापित पदकुल पदों में हिस्सेदारी
OBC4,43825.02%
EWS2,88216.25%
सामान्य वर्ग6,70437.80%
SC3,69820.85%
ST130.07%
कुल17,735100%

इन आंकड़ों को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि OBC, SC और ST वर्ग को उनके निर्धारित आरक्षण के मुकाबले कम पद मिले हैं, जबकि EWS वर्ग के पदों का प्रतिशत 10 फीसदी के सामान्य आरक्षण से अधिक है।

हालांकि, ये आंकड़े कुल पदों में अलग-अलग वर्गों की हिस्सेदारी दिखाते हैं। केवल इन प्रतिशतों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि भर्ती में आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इसके लिए विद्यालयवार रिक्तियों और लागू नियमों को देखना जरूरी है।


आरक्षण विवाद पर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने क्या सफाई दी?

आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि भर्ती के लिए पदों का विवरण संबंधित विद्यालयों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संचालित अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से रिक्तियों की जानकारी जुटाई थी।

इस जानकारी में विद्यालयवार, विषयवार और श्रेणीवार पदों का विवरण शामिल था। इसके बाद संबंधित विवरण आयोग को भेजा गया और उसी के आधार पर भर्ती के पद निर्धारित किए गए।

आयोग के मुताबिक, आरक्षण का निर्धारण सभी विद्यालयों की रिक्तियों को जोड़कर एक ही इकाई मानने के बजाय संबंधित नियमों के अनुसार विद्यालयवार किया जाता है।

इसका मतलब है कि किसी एक विद्यालय में किसी विषय के लिए उपलब्ध पदों और लागू आरक्षण नियमों के आधार पर पदों का बंटवारा हो सकता है। इसलिए पूरे प्रदेश के सभी पदों को जोड़कर सामान्य आरक्षण प्रतिशत से तुलना करना पूरी प्रक्रिया की सही तस्वीर नहीं देता।


टीजीटी भर्ती में विद्यालयवार आरक्षण क्यों लागू होता है?

आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आरक्षण निर्धारित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय को अलग इकाई के रूप में देखा जाता है। संबंधित विद्यालय का प्रबंधन नियुक्ति प्राधिकारी होता है।

इसी वजह से पदों का निर्धारण विद्यालय में उपलब्ध रिक्तियों और उन पर लागू नियमों के अनुसार किया जाता है। सभी विद्यालयों की रिक्तियों को एक साथ जोड़कर पूरे प्रदेश के लिए एक ही अनुपात लागू करना आयोग की बताई गई व्यवस्था नहीं है।

यही इस विवाद का सबसे अहम बिंदु है। वायरल आंकड़ों में कुल पदों की संख्या को आधार बनाया जा रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि आरक्षण की गणना विद्यालयवार होती है।

हालांकि, इस स्पष्टीकरण से विवाद के हर सवाल का अपने आप समाधान नहीं हो जाता। किसी खास विद्यालय या श्रेणी में पदों का निर्धारण सही हुआ या नहीं, इसकी जांच संबंधित रिक्तियों और लागू नियमों के आधार पर ही की जा सकती है।


आयोग ने पिछली भर्तियों का भी दिया हवाला

आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में विज्ञापन संख्या 01/2022 और 02/2022 का भी उल्लेख किया है। आयोग के अनुसार, इन भर्तियों की प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था और शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी की गई थी।

वर्तमान भर्ती को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में आयोग ने पिछली भर्ती प्रक्रियाओं का उदाहरण देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इसके अलावा, विज्ञप्ति में बताया गया कि शासन की ओर से E-Gyan Ganga-U.P. सोशल मीडिया अकाउंट पर भी इस मामले में जानकारी साझा की गई है।


अभ्यर्थियों को अब क्या करना चाहिए?

टीजीटी भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे वायरल पोस्ट या अधूरी जानकारी के आधार पर कोई निष्कर्ष न निकालें।

  • आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें: भर्ती और आरक्षण से जुड़े नियमों की जानकारी आयोग के विज्ञापन और आधिकारिक स्पष्टीकरण से लें।

  • अपने विषय और विद्यालय की रिक्तियां जांचें: सिर्फ कुल पदों की संख्या के बजाय संबंधित विद्यालय और विषय के पदों को देखें।

  • सोशल मीडिया के दावों की पुष्टि करें: किसी पोस्ट में आरक्षण में गड़बड़ी का दावा हो तो उसे आधिकारिक दस्तावेजों से मिलाएं।

  • अपुष्ट जानकारी आगे न बढ़ाएं: आयोग ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से भ्रामक या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।


क्या टीजीटी भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी हुई है?

यूपी टीजीटी भर्ती 2026 में 17,735 पदों के बंटवारे को लेकर OBC, SC और ST वर्ग को कम पद मिलने तथा EWS को ज्यादा पद दिए जाने के आरोप उठे हैं। दूसरी ओर, शिक्षा सेवा चयन आयोग का कहना है कि आरक्षण का निर्धारण विद्यालयवार किया जाता है, न कि प्रदेश के सभी पदों को एक साथ जोड़कर।

इसलिए केवल कुल पदों में वर्गवार प्रतिशत देखकर आरक्षण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि नहीं की जा सकती। असल स्थिति समझने के लिए विद्यालयवार रिक्तियों, लागू आरक्षण नियमों और आधिकारिक दस्तावेजों की जांच जरूरी है।