Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● ग्रेटर नोएडा के पाली गांव में भैंसों की संदिग्ध मौत से हड़कंप, युवक को ग्रामीणों ने पकड़ा ● दिल्ली कालकाजी रेप केस: फरार दोनों आरोपी हेमंत और मुकेश गिरफ्तार ● न्यू नोएडा में जमीन अधिग्रहण के लिए गांवों में लगेंगे कैंप, किसानों को नहीं लगाने पड़ेंगे प्राधिकरण के चक्कर ● आईएएस की तैयारी कर रहीं मायावती कांशीराम के संपर्क में कैसे आईं, 1989 में बनीं पहली बार सांसद ● यूपी के आबकारी निर्यात में 45.4फीसदी का उछाल, 127.8 लाख डॉलर तक पहुंचा निर्यात ● यूपी में पोस्टर वार तेज, अखिलेश यादव के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें लगाकर लगाए गए नारे ● मेरठ में सीएम योगी बोले- व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश, परिवारवाद पर सपा-कांग्रेस को घेरा ● नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी को मिला ‘एक्सीलेंस इन रिसर्च, इनोवेशन एंड साइंटिफिक एडवांसमेंट’ पुरस्कार ● गौतमबुद्धनगर में मजबूत होंगी अग्निशमन सेवाएं, नए फायर स्टेशन और उपकरणों के लिए करोड़ों का बजट मंजूर ● गौतमबुद्धनगर में नशे के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा, 151 करोड़ के मादक पदार्थ बरामद

Health: Bill Gates को है एस्परगर सिंड्रोम, बेटी फोबे ने किया खुलासा

top-news

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ‘एस्परगर सिंड्रोम’ नामक न्यूरोडेवलपमेंट समस्या से पीड़ित हैं। यह जानकारी उनकी बेटी फोबे गेट्स ने हाल ही में एक पॉडकास्ट ‘कॉल हर डैडी’ में साझा की। फोबे ने बताया कि उनके पिता सामाजिक रूप से थोड़े अजीब हैं और यह स्थिति कई बार परिवार के लिए अजीबोगरीब हो जाती है। उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि जब वह अपने बॉयफ्रेंड को घर लेकर आईं तो उनके लिए बिल गेट्स से मिलना एक भयानक अनुभव था।

एस्परगर सिंड्रोम को अब एक अलग बीमारी नहीं माना जाता, बल्कि यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का हिस्सा है। इससे ग्रस्त व्यक्ति को आई कॉन्टैक्ट, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज समझने और प्रयोग करने में कठिनाई होती है। ऐसे लोग बातचीत में असहज महसूस कर सकते हैं और कई बार एक ही बात को दोहराते रहते हैं, जिससे संवाद और जटिल हो जाता है।

इस समस्या के पीछे के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों का परिणाम मानते हैं। इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन सपोर्टिव थेरेपी से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर निदान कर सहायक चिकित्सा देते हैं जिससे प्रभावित व्यक्ति सामान्य जीवन बेहतर ढंग से जी सके।