Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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जंतर-मंतर पर CJP का धरना तीसरे दिन भी जारी, आधार-पैन जांच पर पुलिस से विवाद; किसानों का मिला समर्थन

शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। इस दौरान धरना स्थल पर आने वाले लोगों की पहचान संबंधी जांच को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद भी देखने को मिला।
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शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। इस दौरान धरना स्थल पर आने वाले लोगों की पहचान संबंधी जांच को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद भी देखने को मिला।


अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले लोगों से आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगे जा रहे हैं, जबकि वे केवल आंदोलन में शामिल होने, पानी पहुंचाने या भोजन उपलब्ध कराने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की निजता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। दीपके ने कहा कि आधार कार्ड के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है, इसलिए ऐसी जांच उचित नहीं है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि किसी भी तरह की अनावश्यक जानकारी नहीं मांगी जा रही है।


इसी बीच आंदोलन को नया समर्थन भी मिला है। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के चढूनी गुट ने CJP के आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा की है। संगठन ने छात्रों के मुद्दों के साथ खड़े होने और प्रदर्शन में भाग लेने का फैसला किया है। धरना स्थल पर स्वयंसेवक चाय, समोसे और पानी जैसी सुविधाओं की व्यवस्था संभाल रहे हैं। CJP नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों स्वयंसेवकों के सहयोग और समर्पण का परिणाम है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।