दिल्ली प्रदर्शन में पैलेट गन विवाद: छात्रों के घायल होने के दावे, पुलिस का इनकार, जानिए क्या है पूरा मामला
- Kapil Choudhary
- 24 Jul, 2026
दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। प्रदर्शन में घायल हुए कुछ छात्रों ने दावा किया है कि उन्हें पैलेट गन के छर्रे लगे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एक घायल प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने लाकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में पैलेट गन के उपयोग, इसकी वैधता और दंगा नियंत्रण में इसके इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पैलेट गन का इतिहास 1990 के दशक से जुड़ा है। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की स्थापना के बाद शुरुआत में ये हथियार इज़राइल और बेल्जियम से आयात किए गए थे। बाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की सहायता से इनका निर्माण भारत में भी शुरू हुआ। शुरुआती दौर में एक शेल दागने वाली गन बनाई गई थी, जिसे वर्ष 2011 में मल्टी-बैरल लॉन्चर में विकसित किया गया। एक लॉन्चर में छह से आठ शेल लगाए जा सकते हैं और प्रत्येक शेल से लगभग 30 छर्रे निकलते हैं। इस तरह कुछ ही सेकंड में 180 से अधिक छर्रे छोड़े जा सकते हैं। पूर्व सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, पैलेट गन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित हथियार माना जाता है और इसके उपयोग को लेकर लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों की आपत्तियां रही हैं। यदि इसे करीब 23 गज की दूरी से चलाया जाए तो यह आंख, चेहरा या छाती पर गंभीर और स्थायी चोट पहुंचा सकती है।
जानकारी के अनुसार, डीआरडीओ में निर्मित पैलेट गन को वर्ष 2012 में लाइबेरिया और मालदीव जैसे देशों में दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ भेजा गया था। भारत में किसान आंदोलन और वर्ष 2016 के कश्मीर अशांति के दौरान भी इसके इस्तेमाल की चर्चा हुई थी, हालांकि कश्मीर में इसके उपयोग को लेकर अदालत में चुनौती दिए जाने के बाद इसका प्रयोग सीमित हो गया। आरएएफ की प्रत्येक बटालियन में बड़ी संख्या में पैलेट गन उपलब्ध होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल दिल्ली में हुए प्रदर्शन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ या नहीं। जहां घायल छात्र और विपक्ष इसके इस्तेमाल का दावा कर रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस इन आरोपों से लगातार इनकार कर रही है। ऐसे में इस पूरे मामले की सच्चाई जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *