Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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कुलगाम आतंकी हमला: नाम पूछकर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या, TRF ने ली जिम्मेदारी, घाटी में बढ़ी दहशत

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था और टारगेट किलिंग के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार देर शाम कुलगाम के केलम इलाके में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों पर आतंकियों ने गोलीबारी कर दी।
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जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था और टारगेट किलिंग के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार देर शाम कुलगाम के केलम इलाके में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों पर आतंकियों ने गोलीबारी कर दी। इस हमले में 24 वर्षीय दीपक रात्रे की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 28 वर्षीय भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले जीएमसी अनंतनाग और बाद में श्रीनगर के एसकेआईएमएस अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आतंकियों ने गोली चलाने से पहले दोनों मजदूरों से उनके नाम पूछे थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के छाया संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। पुलिस ने मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी है और उनके परिवार कश्मीर के लिए रवाना हो चुके हैं।


सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह महज 10 दिनों के भीतर घाटी में टारगेट किलिंग की दूसरी बड़ी घटना है। जांच में संकेत मिले हैं कि हमले में असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया गया और इसमें पाकिस्तानी आतंकियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आतंकियों का मकसद घाटी में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों और बाहरी नागरिकों के बीच डर का माहौल पैदा करना है ताकि जम्मू-कश्मीर में सामान्य होते हालात और विकास की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया जा सके। इसी सप्ताह सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के दो बड़े प्रयास नाकाम किए थे और एक पाकिस्तानी ड्रोन भी मार गिराया था। इन घटनाओं को देखते हुए पूरे दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है तथा आतंकियों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।


सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा भी थी, लेकिन कड़े सुरक्षा इंतजामों के चलते वे अपनी साजिश को अंजाम नहीं दे सके। इससे पहले अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की भी टारगेट किलिंग की गई थी, जिसके बाद हजारों संदिग्धों से पूछताछ की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यकों और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर आतंकी घाटी में फिर से भय का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस हमले के हर पहलू की जांच कर रही हैं और दोषियों को जल्द पकड़ने का दावा कर रही हैं। इस बीच पूरे देश में इस घटना को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल है तथा निर्दोष नागरिकों की हत्या की व्यापक निंदा की जा रही है।