Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING
NEWS
● ग्रेटर नोएडा में हिंडन नदी हादसा! 12 किमी दूर मिला डूबे युवक का शव, दूसरे की तलाश में गाद बनी चुनौती
● दिल्ली में PG-हॉस्टलों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, एक सप्ताह में सेफ्टी ऑडिट के आदेश
● खेड़ी गांव में आबादी के बीच डॉग शेल्टर पर कार्रवाई की मांग, बुजुर्ग से मारपीट के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
● प्रेस क्लब ऑफ भारत में शिक्षक सम्मान समारोह, शिक्षा और पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर हुआ मंथन
● खेडी-भनौता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटर कॉलेज में कंप्यूटर लैब का शुभारंभ
● दिल्ली में 29 अक्टूबर को गुर्जर समाज का महासम्मेलन, तालकटोरा स्टेडियम में जुटने की तैयारी
● ग्रेटर नोएडा: खेड़ी भनौता के स्कूल को डेंसो इंडिया की सौगात, 12 आधुनिक शौचालयों का निर्माण
● जन्माष्टमी पर कृष्णमय हुआ देश: मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मुंबई में दही हांडी की जोरदार तैयारी
● Public Exam Reforms: देश की परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार? हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने मांगे सुझाव, 13 सितंबर तक मौका
● Ghaziabad: अजनारा इंटीग्रिटी सोसाइटी में सुविधाएं अधूरी, मेंटेनेंस बढ़ाने और मनमाने बिजली शुल्क का आरोप
दिल्ली में PG-हॉस्टलों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, एक सप्ताह में सेफ्टी ऑडिट के आदेश
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
- sakshi choudhary
- 07 Sep, 2026
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को एक सप्ताह के भीतर दिल्ली के सभी पीजी और हॉस्टलों का सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि असुरक्षित इमारतों से होने वाले हादसों के लिए केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद अदालत ने मामले का संज्ञान लिया।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और एमसीडी की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें निजी पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पीजी को नियंत्रित करने वाले नियमों, वैध बिल्डिंग परमिशन और अधिकारियों की संभावित लापरवाही की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ पीजी मालिक कथित तौर पर स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलों का निर्माण कर रहे हैं, जिसके लिए प्रभावी नियामक व्यवस्था जरूरी है।
हाईकोर्ट ने संबंधित अथॉरिटीज को 10 दिन के भीतर अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने डीयू से दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध हॉस्टल सुविधाओं की विस्तृत जानकारी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। कोर्ट ने अधिकारियों को बचाव अभियान में पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद दिल्ली में पीजी और हॉस्टल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था, अवैध निर्माण और सरकारी एजेंसियों की निगरानी की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।