Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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आकाश आनंद को लेकर बसपा में बढ़ी हलचल, क्या पार्टी में उठ सकता है विद्रोह? बैठकों के दौर से बढ़ीं अटकलें

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मायावती ने पहले 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से मुक्त किया और इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी बाहर कर दिया। मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन आंदोलन से ज्यादा निजी व पारिवारिक रिश्तों को महत्व देने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम के बाद बसपा के भीतर संभावित विद्रोह या बड़े संगठनात्मक उलटफेर की आशंकाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख पिछले कुछ वर्षों में कई बार बदला है। 2024 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक और राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें इन जिम्मेदारियों से हटाया गया। 2025 में दोबारा पार्टी में वापसी के बाद उन्हें अहम संगठनात्मक जिम्मेदारी भी मिली थी। अब एक बार फिर उन्हें पार्टी से बाहर किए जाने के बाद बसपा के अंदर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अशोक सिद्धार्थ ने हाल में राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन इसके बावजूद मायावती ने आकाश को पार्टी में बनाए रखने के बजाय बाहर करने का फैसला लिया।

बसपा में इस घटनाक्रम के बीच बैठकों का दौर भी चर्चा में है और पार्टी के भीतर आगे क्या बदलाव होंगे, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। दूसरी ओर मायावती ने संगठन को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करने और कार्यकर्ताओं को पूरी मजबूती से जुटने का संदेश दिया है। आकाश आनंद के बाहर होने के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद को भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें 15 राज्यों के संगठनात्मक कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश आनंद के निष्कासन का बसपा के संगठन और आगामी चुनावी रणनीति पर क्या असर पड़ेगा और क्या पार्टी में कोई बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिलेगा।