Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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E20 पेट्रोल का असर आपकी थाली पर! महंगे हो सकते हैं अंडे और चिकन, जानिए क्या है वजह

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर सरकार की नई इथेनॉल खरीद नीति का असर अब सिर्फ गाड़ियों के ईंधन तक सीमित नहीं रह सकता। इसका असर खेती, पशु-पक्षियों के चारे और आम लोगों के खाने के बजट पर भी पड़ने की आशंका है।
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भारत में E20 पेट्रोल को लेकर सरकार की नई इथेनॉल खरीद नीति का असर अब सिर्फ गाड़ियों के ईंधन तक सीमित नहीं रह सकता। इसका असर खेती, पशु-पक्षियों के चारे और आम लोगों के खाने के बजट पर भी पड़ने की आशंका है। खासकर अंडे और चिकन खाने वालों की जेब पर इसका असर देखने को मिल सकता है। दरअसल, पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल को बनाने के लिए मक्का का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर, मक्का मुर्गियों के चारे का एक अहम हिस्सा है। अगर मक्का की उपलब्धता कम होती है और उसकी कीमत बढ़ती है, तो पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर अंडे और चिकन की कीमतों पर पड़ सकता है।


क्या है सरकार की नई इथेनॉल नीति?

तेल कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इस बार नई खरीद नीति में गन्ने के रस, सिरप और B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य गन्ने और चीनी के इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि इथेनॉल बनाने के लिए ज्यादा चीनी का इस्तेमाल न हो और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहे. हालांकि, गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के कुछ विकल्पों पर रोक लगने के बाद तेल कंपनियों को मक्का और C-हैवी मोलासेस जैसे दूसरे स्रोतों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।


मक्का से इथेनॉल बनाना क्यों पड़ सकता है महंगा?

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मक्का से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत 68.86 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, B-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की कीमत 60.73 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। यानी इन दोनों कीमतों की तुलना में मक्का आधारित इथेनॉल लगभग 13.4 प्रतिशत महंगा है। अगर तेल कंपनियां मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद बढ़ाती हैं, तो उनकी लागत पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, इथेनॉल बनाने के लिए मक्का की मांग बढ़ने से खाद्य और पशु चारे के बाजार में भी दबाव आ सकता है।


अंडे और चिकन महंगे होने का खतरा क्यों?

मक्का पोल्ट्री उद्योग के लिए बेहद जरूरी है। इसका इस्तेमाल मुर्गियों को खिलाए जाने वाले चारे में बड़े पैमाने पर किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में पैदा होने वाले घरेलू मक्के का करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा पोल्ट्री उद्योग इस्तेमाल करता है। ऐसे में अगर मक्का का बड़ा हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने लगे, तो पोल्ट्री उद्योग के लिए इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। मक्का महंगा होने पर मुर्गियों के चारे की लागत बढ़ेगी। इसके बाद अंडे और चिकन का उत्पादन महंगा पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अंडे और चिकन की कीमतें तुरंत बढ़ ही जाएंगी। कीमतों में बदलाव मक्का की उपलब्धता, मांग, उत्पादन लागत और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।


आम आदमी की जेब पर क्या पड़ेगा असर?

अगर मक्का की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है और पोल्ट्री कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो इसका कुछ बोझ ग्राहकों तक पहुंच सकता है। ऐसे में अंडे और चिकन खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। लेकिन इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह अभी निश्चित नहीं है। E20 पेट्रोल के लिए इथेनॉल की जरूरत पूरी करना ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा है। वहीं, चीनी की उपलब्धता और पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्का की जरूरत के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई नीति से मक्का की कीमतों और आम लोगों के खाद्य बजट पर कितना असर पड़ता है।