Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● पीलीभीत वोटर लिस्ट विवाद: दोनों हटाए गए SDM की लखनऊ में तैनाती रद्द, शासन ने प्रतीक्षारत किया ● काशी को मिली तीन नई ट्रेन सेवाओं की सौगात, दिल्ली के लिए दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर; गाजियाबाद और अलीगढ़ में भी होगा ठहराव ● दिल्ली-NCR में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक, प्रदूषण के बढ़ते खतरे के बीच केंद्र का बड़ा फैसला ● भूटान में ग्लेशियर झील फटने से आई बाढ़, भारत में अलर्ट: आखिर क्या होता है GLOF, हिमालय में क्यों बढ़ रहा है खतरा? ● यूपी दौरे पर अमित शाह को अखिलेश यादव का तंज, बोले- 'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते', दिल्ली रैली में भी होंगे शामिल ● पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में धूमधाम से मना दिवाली उत्सव, रंगोली-डांस और दीया सजावट प्रतियोगिताओं ने मोहा मन ● ग्रेटर नोएडा में भूजल दोहन के खिलाफ आंदोलन करेगा करप्शन फ्री इंडिया संगठन, किसानों को शिक्षा-चिकित्सा में छूट दिलाने की मांग ● ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में रात 12 बजे तक होगी स्ट्रीट लाइटों की जांच, 6 नवंबर तक खुद निरीक्षण करेंगी ACEO प्रेरणा सिंह ● Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम गोल्ड करीब 1,000 रुपये टूटा; चांदी ₹4,000 से ज्यादा सस्ती ● UP Election 2027: अमित शाह का बड़ा एलान, तीसरी बार भाजपा सरकार बनी तो यूपी में लागू होगा UCC

भूटान में ग्लेशियर झील फटने से आई बाढ़, भारत में अलर्ट: आखिर क्या होता है GLOF, हिमालय में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर कुदरत के बदलते मिजाज ने चिंता बढ़ा दी है।
top-news

नई दिल्ली। हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर कुदरत के बदलते मिजाज ने चिंता बढ़ा दी है। भूटान के शिंटाफू (Sintaphu) ग्लेशियर झील में 29 अक्टूबर को अचानक पानी का तेज बहाव शुरू होने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटना सामने आई। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। भूटान से निकलने वाले पानी के कारण संकोश नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर हिमालय में ग्लेशियर झीलों के फटने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं और इनका खतरा भारत तक कैसे पहुंच रहा है।

क्या होता है GLOF और कैसे आती है अचानक बाढ़?


GLOF का पूरा नाम Glacial Lake Outburst Flood है। हिंदी में इसे हिमनदीय झील के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ कहा जाता है। जब पहाड़ों पर मौजूद ग्लेशियर यानी बर्फ की विशाल नदियां पिघलती हैं, तो उनका पानी पहाड़ों के बीच गड्ढों और निचले इलाकों में जमा होने लगता है। धीरे-धीरे यहां बड़ी-बड़ी झीलें बन जाती हैं। इन झीलों का पानी अक्सर बर्फ, पत्थरों, मिट्टी और मलबे से बनी प्राकृतिक दीवारों के पीछे जमा रहता है। इन दीवारों को मोरेन (Moraine) कहा जाता है। जब भारी बारिश, भूस्खलन, हिमस्खलन, बर्फ के टूटने या पानी के अत्यधिक दबाव के कारण यह प्राकृतिक दीवार टूट जाती है, तो झील का लाखों-करोड़ों घन मीटर पानी एक साथ नीचे की ओर बहने लगता है। यही स्थिति GLOF कहलाती है। पानी के साथ बड़े पत्थर, मिट्टी और मलबा भी बहते हैं, जिससे रास्ते में आने वाले पुल, सड़कें, मकान, खेत और बिजली परियोजनाएं तबाह हो सकती हैं।

हिमालय में क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?


हिमालय में GLOF का खतरा बढ़ने के पीछे जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण कारण है। वैश्विक तापमान बढ़ने से हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियरों के पीछे हटने से नए स्थानों पर झीलें बन रही हैं और पहले से मौजूद झीलों का आकार भी बढ़ रहा है। दूसरी ओर, बर्फ और पत्थरों से बनी प्राकृतिक दीवारें कमजोर होती जा रही हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव, अचानक भारी बारिश, बादल फटना, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाएं इन झीलों को और अस्थिर बना सकती हैं। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से हो रहा निर्माण, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएं और अनियोजित विकास आपदा के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। हालांकि हर GLOF की घटना का कारण एक जैसा नहीं होता, लेकिन जलवायु परिवर्तन हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रहा है।

भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा?


हिमालय से निकलने वाली कई नदियां भारत के बड़े हिस्से की जीवनरेखा हैं। भूटान, नेपाल और तिब्बत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं का असर भारत के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। भूटान की शिंटाफू झील से निकला पानी नदी तंत्र के जरिए भारत की ओर बढ़ा, जिसके चलते पश्चिम बंगाल और असम में अलर्ट जारी करना पड़ा। संकोश नदी के जलस्तर पर विशेष निगरानी रखी गई। भारत में इससे पहले भी GLOF की घटनाएं भारी तबाही मचा चुकी हैं। जून 2013 में केदारनाथ क्षेत्र में चोराबाड़ी झील से जुड़ी बाढ़ की घटना ने उत्तराखंड में भारी नुकसान पहुंचाया था। वहीं, अक्टूबर 2023 में सिक्किम की साउथ ल्होनक झील फटने से तीस्ता नदी में भीषण बाढ़ आई थी। इस आपदा में बड़े पैमाने पर जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था। ये घटनाएं बताती हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली आपदाएं केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि निचले इलाकों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती हैं।

कैसे रोका जा सकता है GLOF का खतरा?


GLOF को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक निगरानी और समय रहते चेतावनी देकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की पहचान, सैटेलाइट के जरिए लगातार निगरानी, झीलों के जलस्तर और प्राकृतिक बांधों की स्थिति का अध्ययन जरूरी है। खतरे वाली झीलों से नियंत्रित तरीके से पानी निकालना, मजबूत जल निकासी व्यवस्था बनाना और शुरुआती चेतावनी प्रणाली विकसित करना भी महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्यों को वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर मंजूरी मिलनी चाहिए। भारत, नेपाल और भूटान जैसे हिमालयी देशों के बीच मौसम, जलस्तर और आपदा संबंधी सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान होना भी जरूरी है। भूटान की हालिया घटना ने साफ कर दिया है कि हिमालय में बदलते पर्यावरण को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े संकट को न्योता दे सकता है।