Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING
NEWS
● ग्रेटर नोएडा: सिरसा और डाढ़ा के 127 किसानों को दिवाली पर मिला 6 फीसदी आबादी भूखंड का तोहफा
● ग्रेटर नोएडा में 85 रेहड़ी-पटरी वालों को मिले वेंडिंग प्लेटफॉर्म, 12 सेक्टरों में बनाए गए हैं 769 प्लेटफॉर्म
● यूपी पुलिस को मिले 4,543 नए सब-इंस्पेक्टर, सीएम योगी बोले- अब भाई-भतीजावाद नहीं, 25 करोड़ जनता ही परिवार
● ग्रेटर नोएडा: दिवाली रंगोली के जरिए छात्राओं ने दिया सोशल मीडिया की लत से बचने का संदेश
● शारदा यूनिवर्सिटी में धूमधाम से मनी दिवाली, ‘दीवाली धमाल 2026’ और ‘दीपोत्सव’ में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक
● यूपी में दो IAS अधिकारियों का तबादला, भवानी सिंह खंगारौत बने गन्ना आयुक्त
● दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- प्रदूषण के लिए सिर्फ किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते
● दिल्ली के चावड़ी बाजार में अनधिकृत निर्माण के दौरान इमारत ढही, एमसीडी के दो अधिकारी निलंबित
● दिल्ली में गंभीर हुआ वायु प्रदूषण, 22 केंद्रों पर AQI 400 पार; 6 से 8 नवंबर तक और बिगड़ सकती है हवा
● यूपी के 14.82 लाख कर्मचारियों को दिवाली बोनस, अधिकतम 6,908 रुपये मिलेंगे
दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- प्रदूषण के लिए सिर्फ किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान गंभीर चिंता जताई।
- sakshi choudhary
- 06 Nov, 2026
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान गंभीर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पराली जलाने के साथ-साथ वाहनों से होने वाले प्रदूषण और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि दिल्ली की हवा इतनी खराब है कि लोगों की आवाज तक प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रदूषण के स्तर को रोजाना करीब 30 सिगरेट पीने जैसा जोखिम बताया। इस पर अदालत ने कहा कि प्रदूषण की समस्या को केवल किसानों के सिर नहीं डाला जा सकता, बल्कि समाज के दूसरे वर्गों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
पराली के साथ परिवहन और स्थानीय प्रदूषण भी बड़ी समस्या
सुनवाई के दौरान अपराजिता सिंह ने बताया कि बारिश के बाद दिल्ली के प्रदूषण स्तर में कुछ कमी आई है, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने 5 नवंबर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 14 प्रतिशत था। उनके अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में परिवहन क्षेत्र प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है। वाहनों के अलावा ऊर्जा उत्पादन, कचरा जलाने और स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण भी समस्या को बढ़ाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं और दूसरे राज्यों से भी रोजाना वाहन राजधानी में प्रवेश करते हैं। ऐसे वाहनों की स्थिति और उनसे निकलने वाले धुएं की निगरानी करना भी जरूरी है। अदालत ने अमीर और संभ्रांत वर्ग के वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल उठाए।
किसानों को मशीनों के साथ आर्थिक मदद भी जरूरी
सुनवाई में पराली प्रबंधन को लेकर किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। अपराजिता सिंह ने कहा कि किसानों को मशीनें उपलब्ध करा देने भर से पराली जलाने की समस्या खत्म नहीं होगी। छोटे किसानों के लिए इन मशीनों को चलाना मुश्किल है और कई किसान उनका ईंधन खरीदने का खर्च भी नहीं उठा पाते। इस पर अदालत ने सुझाव दिया कि पराली खरीदने की दर पहले से घोषित होनी चाहिए और पराली प्रबंधन से जुड़ी मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि छोटे किसानों को भी सुविधा मिल सके। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी के लिए पीयूसी (PUC) प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जियो-टैगिंग जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई ने स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए पराली जलाने के अलावा परिवहन, कचरा प्रबंधन और स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों पर भी एक साथ कार्रवाई की जरूरत है।