Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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गौर अंडरपास से राहत, तिलपता पर अब भी आफत!

ग्रेटर नोएडा में गौर अंडरपास का निर्धारित समय सीमा में ट्रायल शुरू होना प्राधिकरण की सराहनीय उपलब्धि है। हालांकि, तिलपता चौराहे पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से लोगों को अब तक राहत नहीं मिली है। लेख में प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार से मांग की गई है कि गौर अंडरपास की तरह तिलपता चौराहे की यातायात समस्या का भी गंभीरता से संज्ञान लेकर स्थायी और समयबद्ध समाधान किया जाए।
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विकास की सराहना जरूरी, लेकिन जनता को रोजाना जाम से मुक्ति दिलाना भी प्राधिकरण की जिम्मेदारी

ग्रेटर नोएडा में बुनियादी सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में गौर अंडरपास का निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रायल के लिए शुरू होना निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है। इस परियोजना से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन वाहन चालकों को, जिन्हें लंबे समय तक जाम में फंसकर अपना कीमती समय गंवाना पड़ता था। किसी भी शहर के विकास का वास्तविक पैमाना केवल ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आम नागरिक को मिलने वाली सुविधाएं भी होती हैं।
गौर अंडरपास को समय पर शुरू करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। यह कार्य दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति हो और अधिकारी किसी परियोजना को प्राथमिकता दें तो निर्धारित समय में भी बड़े काम पूरे किए जा सकते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जब प्राधिकरण गौर अंडरपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को समय सीमा में पूरा कर सकता है, तो तिलपता चौराहे पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम का समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया?
तिलपता चौराहा: विकास के दावों के बीच एक बड़ी चुनौती
तिलपता चौराहा ग्रेटर नोएडा के उन प्रमुख स्थानों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों वाहन चालक जाम की समस्या से जूझते हैं। सुबह कार्यालय जाने का समय हो या शाम को घर लौटने का, इस चौराहे पर यातायात का दबाव लोगों की परेशानी बढ़ा देता है। नौकरीपेशा लोग, स्कूली बच्चे, व्यापारी और आम नागरिक सभी इस समस्या से प्रभावित होते हैं।
विडंबना यह है कि इस समस्या को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है और प्राधिकरण का ध्यान भी आकर्षित कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं दिया है। आखिर कब तक लोग इसी तरह जाम में फंसकर अपना समय और ईंधन बर्बाद करते रहेंगे?
तिलपता चौराहे की समस्या कोई अचानक पैदा हुई चुनौती नहीं है। यहां यातायात का दबाव और लोगों की परेशानी लंबे समय से सामने आती रही है। ऐसे में प्राधिकरण को केवल समस्या की जानकारी रखने के बजाय उसके समाधान की दिशा में ठोस और समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।

केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, समस्याओं का समाधान भी जरूरी
गौर अंडरपास की शुरुआत ने उम्मीद जगाई है कि ग्रेटर नोएडा में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्राधिकरण गंभीरता से काम कर रहा है। लेकिन विकास का लाभ तभी पूरा माना जाएगा, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी जाम से राहत मिले।
प्राधिकरण को तिलपता चौराहे का यातायात सर्वे कराकर वहां की वास्तविक समस्या का आकलन करना चाहिए। जरूरत के अनुसार सड़क चौड़ीकरण, चौराहे का पुनर्गठन, अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था और फ्लाईओवर या अंडरपास जैसे स्थायी विकल्पों पर तकनीकी अध्ययन कराया जाना चाहिए।
अब सीईओ से उम्मीद
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार से शहरवासियों को उम्मीद है कि जिस गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ गौर अंडरपास को समय सीमा के भीतर ट्रायल के लिए शुरू कराया गया है, उसी इच्छाशक्ति के साथ तिलपता चौराहे की समस्या का भी समाधान कराया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा को विकास के नए आयाम देने के साथ-साथ यहां के नागरिकों को जाम मुक्त सफर देना भी उतना ही जरूरी है। गौर अंडरपास एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन विकास की यह गाड़ी तिलपता चौराहे पर आकर नहीं रुकनी चाहिए।

अब शहरवासियों का सवाल सीधा है गौर अंडरपास के बाद तिलपता चौराहे को जाम से मुक्ति कब मिलेगी?