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ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था की बदहाली: शिकायतों पर टिका सिस्टम, गांवों में और बुरा हाल

ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर के सेक्टरों और गांवों में कूड़े के ढेर, गंदी नालियां और सफाई की अनदेखी आम हो गई है। सफाई कंपनियां केवल शिकायत मिलने पर काम करती हैं
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ग्रेटर नोएडा, कपिल चौधरी 

ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के तहत शहर की सफाई व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। शहर के विभिन्न सेक्टरों और गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर, जाम नालियां, और गंदगी की शिकायतें आम बात हो गई हैं। निवासियों का आरोप है कि सफाई कंपनियां केवल शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई करती हैं, और वह भी अस्थायी रूप से। इसके बाद नियमित सफाई के लिए कोई कर्मचारी दोबारा नहीं पहुंचता। गांवों की स्थिति तो और भी दयनीय है, जहां प्राधिकरण के रिकॉर्ड में दर्ज कर्मचारियों की संख्या और जमीनी हकीकत में भारी अंतर देखने को मिलता है।

शिकायतों पर टिका सफाई सिस्टम

निवासियों का कहना है कि सफाई कंपनियां केवल तभी सक्रिय होती हैं, जब सोशल मीडिया या प्राधिकरण के पास शिकायतें पहुंचती हैं। सफाई के नाम पर केवल दिखावा होता है। शिकायत करने पर दो-चार कर्मचारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और फिर महीनों तक कोई सफाई नहीं होती। सड़कों पर कूड़े के ढेर और गलियों में पत्तों की गंदगी आम बात है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा सफाई के लिए ठेकेदार कंपनियों को टेंडर दिए जाते हैं, जिनमें नियमित सफाई, कूड़ा संग्रहण, और नालियों की सफाई जैसे कार्य शामिल होते हैं। 

गांवों में बदतर स्थिति

शहर के गांवों में सफाई व्यवस्था की स्थिति और भी चिंताजनक है। गांवों में नालियों की सफाई नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। सार्वजनिक शौचालयों की पाइपलाइन टूटी होने और सीवर कनेक्शन न होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "प्राधिकरण के रिकॉर्ड में 10 सफाई कर्मचारी दिखाए जाते हैं, लेकिन मौके पर केवल 2-3 लोग ही काम करते नजर आते हैं। बाकी का हिसाब-किताब कहां जाता है, यह प्राधिकरण को देखना चाहिए।

प्राधिकरण की कार्रवाई: सख्ती या दिखावा?

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने समय-समय पर सफाई में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। इसी तरह, 2025 में एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने इकोटेक-थ्री क्षेत्र में गंदगी पाए जाने पर बिमलराज कॉन्ट्रैक्टर पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और दो अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया। हाल ही में, प्राधिकरण ने दो सेनेटरी इंस्पेक्टर और दो सेनेटरी सुपरवाइजर की सेवा समाप्त की, साथ ही ठेकेदार फर्म पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। लेकिन निवासियों का कहना है कि ये कार्रवाइयां केवल तात्कालिक होती हैं और दीर्घकालिक समाधान की कमी दिखती है।

ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था की बदहाली न केवल प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि ठेकेदार कंपनियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को भी उजागर करती है। जब तक प्राधिकरण और ठेकेदार मिलकर नियमित और पारदर्शी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करते, शहरवासियों को कूड़े के ढेर और गंदगी से जूझना पड़ता रहेगा। निवासियों की मांग है कि प्राधिकरण केवल शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय एक स्थायी और प्रभावी सफाई तंत्र विकसित करे।



ग्रेटर नोएडा में सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर के सेक्टरों और गांवों में कूड़े के ढेर, गंदी नालियां और सफाई की अनदेखी आम हो गई है। सफाई कंपनियां केवल शिकायत मिलने पर काम करती हैं, वो भी अस्थायी रूप से।