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ग्रेटर नोएडा में अधूरी इमारतों में दिया जा रहा पजेशन, प्राधिकरण चुप, दुर्घटना का जिम्मेदार कौन?
बिना फायर सेफ्टी, बिना बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था और बिना अधिभोग प्रमाण पत्र के लोगों को रहने देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधा-सीधा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। आग लगने या किसी आपदा की स्थिति में इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
- Kapil Choudhary
- 21 Jan, 2026
ग्रेटर नोएडा: कपिल चौधरी
ग्रेटर नोएडा शहर में बिल्डरों की मनमानी और प्राधिकरण की चुप्पी सवालों के घेरे में है। यहाँ एक नया चलन देखने को मिल रहा है। बिल्डर बिना प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate), बिना फायर विभाग की एनओसी और बिना सुरक्षा मानकों को पूरा किए ही खरीदारों को पजेशन देना शुरू कर चुके हैं।
खास बात यह है कि ये पजेशन अधूरी और असुरक्षित इमारतों में दिया जा रहा है, जहाँ न तो सुरक्षा उपकरण लगे हैं और न ही भवन निर्माण के नियमों का पालन किया गया है। ऐसे में हजारों परिवारों की जान सीधे-सीधे खतरे में डाली जा रही है।
क्या प्राधिकरण की मौन सहमति?
लोगों का कहना है कि यह सब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की जानकारी और शायद मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना आवश्यक अनुमतियों के बिल्डरों को कैसे छूट मिल रही है? क्या यह सब प्राधिकरण की सह पर हो रहा है या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह नाकाम हो चुका है?
लोगों की सुरक्षा दांव पर
बिना फायर सेफ्टी, बिना बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था और बिना अधिभोग प्रमाण पत्र के लोगों को रहने देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधा-सीधा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। आग लगने या किसी आपदा की स्थिति में इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासी और खरीदार मांग कर रहे हैं कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तुरंत ऐसे प्रोजेक्ट्स की जांच करे और जिम्मेदार बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। सवाल यह भी उठता है कि जब तक प्राधिकरण सख्त कदम नहीं उठाएगा, तब तक क्या आम लोगों की जान से यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा?