Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा में बढ़ती बिजली खपत, भविष्य में संकट की आशंका

ग्रेटर नोएडा में इस गर्मी बिजली की खपत 950 मेगावाट तक पहुँच सकती है। अनुमान है कि साल 2030 तक यह खपत 1400 मेगावाट तक बढ़ जाएगी। वर्तमान में शहर के पास केवल 1220 मेगावाट की ट्रांसमिशन क्षमता है, जो आने वाले समय में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। नई ट्रांसमिशन लाइन बनाने की योजना अभी तक तैयार नहीं है, और इसे धरातल पर लागू करने में लगभग तीन साल का समय लगेगा।
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ग्रेटर नोएडा में इस गर्मी बिजली की खपत 950 मेगावाट तक पहुँच सकती है। अनुमान है कि साल 2030 तक यह खपत 1400 मेगावाट तक बढ़ जाएगी। वर्तमान में शहर के पास केवल 1220 मेगावाट की ट्रांसमिशन क्षमता है, जो आने वाले समय में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। नई ट्रांसमिशन लाइन बनाने की योजना अभी तक तैयार नहीं है, और इसे धरातल पर लागू करने में लगभग तीन साल का समय लगेगा।


इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी और प्रस्ताव

ग्रेटर नोएडा में बिजली आपूर्ति का लाइसेंस एनपीसीएल के पास है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर योजना बनाने की जिम्मेदारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की है। ट्रांसमिशन लाइन यूपीपीटीसी तैयार करता है। एनपीसीएल ने भविष्य की बिजली जरूरतों के अनुसार प्राधिकरण को प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एनपीसीएल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ऑपरेशन सारनाथ गांगुली ने कहा कि अगर काम अभी शुरू नहीं हुआ, तो भविष्य में बिजली आपूर्ति गड़बड़ाने का खतरा है।


आवश्यक समाधान और क्षमता बढ़ोतरी

शहर में बिजली की खपत पूरी करने के लिए कम से कम 220 केवी के दो नए बिजली घरों की आवश्यकता है। इससे 700 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता बढ़ सकती है, जो अगले पांच वर्षों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी। प्राधिकरण को तत्काल योजनाओं को धरातल पर लाना होगा, नहीं तो आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा के निवासियों को बिजली कटौती और संकट से जूझना पड़ सकता है।