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नोएडा में सरकारी अस्पतालों की मांग तेज, निजी अस्पतालों को प्लॉट आवंटन के खिलाफ मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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नोएडा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की मांग जोर पकड़ने लगी है। आज जिला कलेक्ट्रेट में सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें नोएडा अथॉरिटी द्वारा निजी अस्पतालों को जमीन आवंटित करने का विरोध किया गया। एक्टिव सिटिज़न टीम ने मांग की कि प्राधिकरण निजी अस्पतालों के लिए प्लॉट देने के बजाय सरकारी अस्पतालों का निर्माण करे, ताकि आम जनता को affordable healthcare और बेहतर medical facilities मिल सकें।


ज्ञापन में कहा गया कि नोएडा क्षेत्र में पहले से लगभग 95 प्रतिशत अस्पताल निजी क्षेत्र के हैं, जहां इलाज का खर्च आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग, किसान और मजदूरों के लिए काफी महंगा साबित होता है। संगठन का कहना है कि लाखों लोगों के पास सस्ती और सुलभ health services का प्रभावी विकल्प नहीं है, जिससे लोगों को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नोएडा अथॉरिटी द्वारा दो अस्पतालों के प्लॉट बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसका स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ता जा रहा है।

एक्टिव सिटिज़न टीम के सदस्यों ने बताया कि इससे पहले भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा चार प्लॉट निजी अस्पतालों को आवंटित किए जा चुके हैं, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। इसके बावजूद दोबारा निजी अस्पतालों के लिए प्लॉट निकाले जाने से लोगों में नाराजगी है। ज्ञापन सौंपने वालों में मंजीत सिंह, साधना सिन्हा, हरेंद्र भाटी, आलोक सिंह, सुनील प्रधान और रमेश प्रेमचंदानी शामिल रहे। संगठन ने सरकार से मांग की है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में public healthcare system को मजबूत करने के लिए सरकारी अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए।

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