Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● टीम इंडिया की जीत के बाद श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान, वीवीएस लक्ष्मण की तारीफ से गौतम गंभीर पर छिड़ी बहस ● ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 की ATS Pristine सोसाइटी में 19 वर्षीय घरेलू सहायिका ने फंदा लगाकर की आत्महत्या, पुलिस जांच में जुटी ● दिल्ली-एनसीआर मौसम अपडेट: बारिश से गर्मी और उमस से राहत, 1 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम? ● ग्रेनो वेस्ट में EMCT की अनोखी पहल, घरेलू सहायिकाओं और हाउसकीपिंग कर्मचारियों को मासिक धर्म स्वच्छता का दिया संदेश ● कलाधाम हादसे पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई, तीन अधिकारियों पर गिरी गाज, शासन को भेजी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति ● ग्रेटर नोएडा के कलाधाम में नलकूप के गड्ढे में भरे पानी में डूबने से 6 वर्षीय बच्चे की मौत, प्राधिकरण ने ठेकेदार समेत तीन पर एफआईआर दर्ज कर कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट ● ग्रेटर नोएडा में खुले गड्ढे में डूबने से 6 वर्षीय मासूम की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ● धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: जानें 1947 से 2026 तक भारत के सभी शिक्षा मंत्रियों का कार्यकाल, किसने सबसे ज्यादा और सबसे कम समय संभाला मंत्रालय ● डायट दनकौर में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ प्रशिक्षण का दूसरा बैच संपन्न, शिक्षकों को मानवीय और संवैधानिक मूल्यों पर मिला विशेष प्रशिक्षण ● ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 में बदलेंगे जर्जर बिजली के पोल, पार्कों में लगेंगी हाईमास्ट लाइटें, प्राधिकरण ने शुरू किया समाधान अभियान

नोएडा श्रमिक आंदोलन पर माकपा का आरोप: पुलिस हिरासत में मारपीट और फर्जी मामलों में फंसाने का दावा

नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।
top-news

नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।


माकपा के महासचिव एमए बेबी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में जमानत पर रिहा हुए श्रमिकों से मुलाकात की। इस दौरान श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें एक महीने तक जेल में रखा गया और कानूनी सहायता तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रतिनिधिमंडल में पोलित ब्यूरो सदस्य आर. अरुण कुमार, तपन सेन और राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन सहित अन्य नेता शामिल थे। माकपा ने यह भी दावा किया कि उन्हें जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।


माकपा ने आगे आरोप लगाया कि फैब्रैक्ट क्लोदिंग और विब्राकोस्टिक इंडिया जैसी कंपनियों में मजदूरों को संगठित होने से रोका जाता है और नेतृत्व करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। पार्टी ने कहा कि यूपी सरकार और प्रशासन की नीतियां श्रमिक आंदोलन को दबाने की दिशा में काम कर रही हैं। हालांकि, माकपा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह श्रमिकों को कानूनी और राजनीतिक समर्थन जारी रखेगी। पार्टी का दावा है कि मजदूरों की एकता ही इस तरह की कार्रवाई का सबसे मजबूत जवाब है और आने वाले समय में आंदोलन और तेज हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *