Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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नोएडा श्रमिक आंदोलन पर माकपा का आरोप: पुलिस हिरासत में मारपीट और फर्जी मामलों में फंसाने का दावा

नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।
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नोएडा में अप्रैल 2026 के दौरान हुए श्रमिक आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूरों के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उन्हें फर्जी सबूतों के आधार पर कई मामलों में फंसाया गया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है और सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया है।


माकपा के महासचिव एमए बेबी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में जमानत पर रिहा हुए श्रमिकों से मुलाकात की। इस दौरान श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें एक महीने तक जेल में रखा गया और कानूनी सहायता तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रतिनिधिमंडल में पोलित ब्यूरो सदस्य आर. अरुण कुमार, तपन सेन और राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन सहित अन्य नेता शामिल थे। माकपा ने यह भी दावा किया कि उन्हें जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।


माकपा ने आगे आरोप लगाया कि फैब्रैक्ट क्लोदिंग और विब्राकोस्टिक इंडिया जैसी कंपनियों में मजदूरों को संगठित होने से रोका जाता है और नेतृत्व करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। पार्टी ने कहा कि यूपी सरकार और प्रशासन की नीतियां श्रमिक आंदोलन को दबाने की दिशा में काम कर रही हैं। हालांकि, माकपा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह श्रमिकों को कानूनी और राजनीतिक समर्थन जारी रखेगी। पार्टी का दावा है कि मजदूरों की एकता ही इस तरह की कार्रवाई का सबसे मजबूत जवाब है और आने वाले समय में आंदोलन और तेज हो सकता है।

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