ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास से एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी तक 7 बड़े फैसले, जानें क्या बदलेगा
- sakshi choudhary
- 03 Sep, 2026
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले अप्रवासी श्रमिकों को बेहतर आवास और सुविधाएं देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई बड़े फैसले लिए हैं। प्राधिकरण बोर्ड ने EWS फ्लैट, ट्रांजिट लेबर हॉस्टल और पब्लिक लाइब्रेरी बनाने को मंजूरी दी है। पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में अप्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाए जाएंगे। जमीन चिन्हित हो चुकी है और इसी साल के अंत तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य है। वहीं, सेक्टर ईकोटेक-06 और ईकोटेक-11 में 3000-3000 वर्ग मीटर जमीन श्रम विभाग को ट्रांजिट लेबर हॉस्टल के लिए निशुल्क दी जाएगी। इससे रोजगार की तलाश में आने वाले श्रमिकों को कम किराये में अस्थायी आवास मिल सकेगा। इसके अलावा सेक्टर अल्फा-1 में 1360 वर्ग मीटर क्षेत्र में पब्लिक लाइब्रेरी बनेगी, जिसमें बच्चों, छात्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए किताबों की सुविधा होगी।
कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी ग्रेटर नोएडा में बड़े बदलाव की तैयारी है। 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए डबल डेकर रोड बनाई जाएगी। पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक सड़क बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी अनुमानित लागत 756.01 करोड़ रुपये होगी। परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण मिलकर वहन करेंगे। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा फेस-2 के ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर लंबी 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना को भी मंजूरी मिली है। यह सड़क 10 लेन और चार सर्विस लेन की होगी। रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लिंक लाइन और जीटी रोड पर तीन ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। सड़क निर्माण का खर्च एनएचएआई उठाएगा, जबकि भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्राधिकरणों की होगी। इससे ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ग्रामीणों और आपदा प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। रिठौरी गांव में रेलवे लाइन के ऊपर फुटओवर ब्रिज बनाया जाएगा, जिसमें रैंप, सीढ़ियों और लिफ्ट की सुविधा होगी। इसके निर्माण का खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उठाएगा और रेलवे से आवश्यक एनओसी ली जाएगी। आवासीय भूखंडों पर निर्माण पूरा करने और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए आवंटियों को 30 जून 2028 तक अंतिम अवसर दिया गया है। इसके बाद प्रमाण पत्र नहीं लेने पर आवंटन रद्द किया जा सकता है। वहीं, आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत-बचाव के लिए सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में एनडीआरएफ की 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रिस्पांस सेंटर के लिए 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा शहर की सड़कों से धूल-मिट्टी कम करने और वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सेंट्रल और ईस्ट जोन में पांच साल तक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग कराई जाएगी। इन फैसलों से ग्रेटर नोएडा में श्रमिक कल्याण, आवास, शिक्षा, कनेक्टिविटी, आपदा प्रबंधन और साफ-सफाई के क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है।