Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT रिपोर्ट में चोरी, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है, जिसमें चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिले हैं।
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है, जिसमें चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिले हैं। छह दिनों तक अयोध्या में जांच करने के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन, विस्तृत ऑडिट और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कई कर्मचारियों और पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में खामियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक हेरफेर किया जाता रहा। रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।


SIT की रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम जांच के दायरे में आया है। रिपोर्ट में इनके करीबी लोगों और रिश्तेदारों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद के जरिए ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने बाद में व्यवस्था की कमजोरियों का लाभ उठाया। आरोप है कि दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति में प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप था। रिपोर्ट में करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही अनिल मिश्रा पर कथित कमीशनखोरी के आरोपों का भी जिक्र किया गया है।


जांच में यह भी सामने आया है कि दान राशि के कथित गबन का सिलसिला करीब सवा साल तक चलता रहा। विशेष रूप से महाकुंभ और माघ मेले के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से चढ़ावे में भारी वृद्धि हुई, जिसका कथित रूप से कुछ लोगों ने फायदा उठाया। जांच के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई पूरी राशि को एक जगह इकट्ठा किया जाता था और फिर गिनती के दौरान रकम पार कर दी जाती थी। अंत में बची हुई राशि का रिकॉर्ड दर्ज कर लिया जाता था, जिससे चोरी पकड़ में नहीं आती थी। हालांकि सोशल मीडिया पर गबन की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन SIT ने अभी तक किसी अंतिम आंकड़े की पुष्टि नहीं की है। विस्तृत जांच अगले दो सप्ताह में पूरी होने की संभावना है, जिससे मामले में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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