लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 64 गड्ढे, उद्घाटन के एक महीने बाद सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवाल
- sakshi choudhary
- 13 Aug, 2026
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को अभी महज एक महीना ही हुआ है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 13 जुलाई को शुरू हुए करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की ग्राउंड पड़ताल में करीब 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में 64 छोटे-बड़े गड्ढे मिले। हालांकि इनमें से ज्यादातर गड्ढों को भर दिया गया है, लेकिन कई जगह सड़क की लंबी पट्टियों की मरम्मत और दोबारा निर्माण का काम अभी भी जारी है। एक्सप्रेसवे पर मरम्मत और असमतल सड़क के चलते जहां कानपुर पहुंचने का दावा करीब 45 मिनट का था, वहीं सफर में करीब 70 मिनट तक लग रहे हैं। कानपुर से लखनऊ की दिशा में कई जगह पहले किया गया पैचवर्क भी उखड़ा हुआ मिला, जिसके बाद दोबारा मरम्मत की जा रही है।
पड़ताल में सड़क की हालत के साथ-साथ निर्माण और फिनिशिंग से जुड़े कई दूसरे सवाल भी सामने आए। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर कम से कम 42 स्थानों पर मिट्टी के ढेर मिले, जबकि सर्विस लेन के किनारे करीब ढाई फीट तक लंबी घास दिखाई दी। लखनऊ से कानपुर की ओर करीब 28वें से 35वें किलोमीटर के बीच लगभग सात किलोमीटर हिस्से में सड़क किनारे मरम्मत का काम चलता मिला। करीब 37.6 किलोमीटर तक पांच जगह नालियों का निर्माण और सुधार कार्य जारी था। बताया गया कि कई स्थानों पर क्रैश बैरियर के कारण पानी की निकासी प्रभावित हुई, जिसके बाद नालियों को दोबारा दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं 39.5 किलोमीटर के पास पुल पर दरार भरने का काम और 39.8 किलोमीटर के आसपास सड़क काटकर दोबारा निर्माण किया जाता मिला। मरम्मत वाले हिस्सों में चार में से सिर्फ एक लेन पर यातायात चलता दिखाई दिया।
इन हालात के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि उद्घाटन के महज एक महीने बाद एक्सप्रेसवे के इतने बड़े हिस्से में मरम्मत और पुनर्निर्माण की जरूरत क्यों पड़ रही है? कई जगह शोल्डर के किनारे घास और मिट्टी के कटाव के निशान भी दिखाई दिए। जानकारों के मुताबिक पानी की उचित निकासी नहीं होने पर सड़क की निचली परत कमजोर हो सकती है, जिसका असर डामर की सतह पर पड़ सकता है। सड़क की स्थिति पर सवाल उठने के बाद निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक ने कई स्थानों पर मरम्मत का काम तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि महंगे टोल वाले इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर जिम्मेदारी किसकी तय होती है और यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधा कब तक मिलती है।
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