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गाजियाबाद में फर्जी मुठभेड़: बढ़ई की हत्या में सेवानिवृत्त एसओ समेत 9 पुलिसकर्मी दोषी करार

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गाजियाबाद। गाजियाबाद स्थित सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा की अदालत ने एटा में वर्ष 2006 में फर्जी मुठभेड़ में बढ़ई की हत्या के मामले में मंगलवार को सेवानिवृत्त एसओ समेत नौ पुलिसकर्मियों को मंगलवार को दोषी करार दिया। सजा के प्रश्न पर आज सुनवाई होगी।
सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने बताया कि तत्कालीन एसओ सिढपुरा पवन सिंह, तत्कालीन उपनिरीक्षक श्रीपाल ठेनुआ, तीन कांस्टेबल सरनाम सिंह, राजेंद्र प्रसाद, मोहकम सिंह को अदालत ने हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया।
इन पांचों को अपहरण के आरोप से दोष मुक्त किया, जबकि चार कांस्टेबल बलदेव प्रसाद, अवधेश रावत, अजय कुमार, सुमेर सिंह को साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया। एक आरोपित तत्कालीन उपनिरीक्षक अजंट सिंह की मुकदमे के विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसीलिए उसकी फाइल बंद कर दी गई थी। दोषी करार देने के साथ ही अदालत ने सभी की जमानत निरस्त करते हुए जेल भेजने के आदेश दिए।
यह था मामला
सीबीआइ के लोक अभियोजक ने बताया कि एटा के सिढपुरा थानाक्षेत्र के सुनेहरा गांव का रहने वाला राजाराम बढ़ई का काम करता था। 18 अगस्त 2006 को सिढपुरा थानाक्षेत्र में पुलिस ने डकैत बताकर उसकी फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी थी। उक्त मुठभेड़ में उपरोक्त 10 पुलिसकर्मी शामिल थे। इनमें से तत्कालीन एसओ पवन सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि बाकी अन्य उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जनपद में तैनात हैं।

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