Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की मांग, 73 विपक्षी सांसदों ने सौंपा नोटिस

देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां 73 विपक्षी सांसदों, जिनमें कांग्रेस सहित कई प्रमुख दल शामिल हैं, ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए राष्ट्रपति को औपचारिक नोटिस सौंपा है। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए उठाया गया है। सांसदों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए “सिद्ध कदाचार” किया है, जो 15 मार्च 2026 के बाद की घटनाओं से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
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देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां 73 विपक्षी सांसदों, जिनमें कांग्रेस सहित कई प्रमुख दल शामिल हैं, ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए राष्ट्रपति को औपचारिक नोटिस सौंपा है। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए उठाया गया है। सांसदों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए “सिद्ध कदाचार” किया है, जो 15 मार्च 2026 के बाद की घटनाओं से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।


विपक्षी सांसदों द्वारा सौंपे गए इस नोटिस में कुल नौ गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें विस्तार से दस्तावेजित किया गया है। आरोपों में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का आचरण निष्पक्ष नहीं रहा और वे सत्ता के इशारों पर काम कर रहे हैं। जयराम रमेश ने यहां तक कहा कि यह स्थिति संविधान पर सीधा हमला है और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बेहद गंभीर विषय है। इस मामले को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उठाया गया है, जिसमें चुनाव आयुक्त को केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर हटाने का प्रावधान है।


संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव को पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। यानी लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कुल सदस्यों के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।