Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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सत्य निकेतन हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा में PG-हॉस्टलों पर फिर सख्ती, 10 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने की घटना के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी शहर में संचालित पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है।
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दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने की घटना के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी शहर में संचालित पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। प्राधिकरण ने सभी संबंधित सीनियर मैनेजरों को अपने-अपने वर्क सर्किल में संचालित पीजी और हॉस्टलों का सर्वे कर मौके पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जांच पूरी कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित पीजी या हॉस्टल प्राधिकरण से पंजीकृत या स्वीकृत है या नहीं। इसके अलावा भवन का उपयोग स्वीकृत मानचित्र के अनुसार किया जा रहा है या नहीं, फायर सेफ्टी एनओसी मौजूद है या नहीं, बिल्डिंग प्लान और लेआउट स्वीकृत हैं या नहीं और भवन में किसी तरह का अवैध अथवा स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण तो नहीं किया गया है, इसकी भी जांच की जाएगी।


ग्रेटर नोएडा में डूब क्षेत्र में बने अवैध पीजी और हॉस्टल भी प्राधिकरण की जांच के दायरे में रहेंगे। नॉलेज पार्क के आसपास पुस्ता के पार डूब क्षेत्र में नियमों के विपरीत निर्माण कर बनाए गए भवनों में बड़ी संख्या में छात्रों के रहने की बात सामने आती रही है। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण की वैधता और भवन सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। डूब क्षेत्र में बिना निर्धारित मानकों के निर्माण और भवनों का व्यावसायिक इस्तेमाल छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय माना जा रहा है। ऐसे में इस बार होने वाले सर्वे में इन इलाकों में संचालित पीजी और हॉस्टलों की अनुमति, निर्माण और सुरक्षा मानकों की विशेष रूप से जांच किए जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में नियमों के विपरीत संचालित पीजी को लेकर प्राधिकरण ने सख्ती दिखाई थी। ऐसे पीजी बंद करने के निर्देश जारी किए गए थे और संचालकों को कार्रवाई के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर पीजी का संचालन जारी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब सत्य निकेतन हादसे के बाद जारी नए निर्देशों से यह भी स्पष्ट होगा कि पहले की कार्रवाई के बाद कितने पीजी बंद हुए और कितने अभी भी संचालित हो रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अवैध निर्माण, नियमों के उल्लंघन और भवन सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्राधिकरण आगे क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।