HIV Cases: वाराणसी में 10 महीने में 900 नए एचआईवी संक्रमित, आधे से ज्यादा किशोर और युवा
- sakshi choudhary
- 24 Oct, 2026
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एचआईवी संक्रमण के सामने आए नए आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल जनवरी से अक्टूबर तक करीब 900 नए लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें आधे से अधिक किशोर और युवा बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि कम उम्र के लोग भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने संक्रमण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को समय पर जांच व इलाज उपलब्ध कराने की चुनौती है।
10 महीने में करीब 900 नए मामले, बीएचयू में सबसे ज्यादा मरीजों की पुष्टि
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में जनवरी से सितंबर के बीच 728 लोगों की एचआईवी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें करीब 150 लोग वाराणसी के रहने वाले हैं। बाकी मरीज पूर्वांचल के जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, सोनभद्र और भदोही सहित दूसरे जिलों तथा बिहार से आए हैं।
वहीं, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जांच कराने वाले 175 लोगों में भी एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इन आंकड़ों से साफ है कि वाराणसी आसपास के कई जिलों के लोगों के लिए इलाज और जांच का एक प्रमुख केंद्र है।
रिपोर्ट में संक्रमित लोगों की उम्र लगभग 15 से 45 वर्ष के बीच बताई गई है। इसका मतलब है कि पढ़ाई करने वाले किशोरों से लेकर नौकरी और परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाले युवाओं तक, सभी को एचआईवी से बचाव की जानकारी होना जरूरी है।
एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना खतरनाक, दो महिलाओं की मौत
एचआईवी संक्रमण फैलने की प्रमुख वजहों में एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थ लेना भी सामने आया है। जिला अस्पताल के ओएसटी सेंटर के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ऐसे 30 लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थ लिए थे। इनमें से दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। अन्य संक्रमित लोगों को नियमित काउंसिलिंग और दवाइयां दी जा रही हैं।
सेंटर के काउंसलर प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव के अनुसार, एचआईवी पॉजिटिव मामलों में करीब 35 प्रतिशत मामले सिरिंज से ड्रग्स लेने वालों के देखे जाते हैं।
एचआईवी एक वायरस है, जो शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत को कमजोर करता है। यह संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई या सिरिंज साझा करने से फैल सकता है। बिना साफ और सुरक्षित उपकरणों के टैटू बनवाने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
हालांकि, हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठकर खाना खाने या सामान्य बातचीत करने से एचआईवी नहीं फैलता। इसलिए संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाने के बजाय उसके साथ सम्मान और सहयोग से पेश आना चाहिए।
मुफ्त जांच और नियमित दवाओं से संभव है बेहतर जीवन
सरकारी अस्पतालों में एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच निशुल्क की जाती है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में मरीजों की जांच, काउंसिलिंग और जरूरत के अनुसार इलाज की व्यवस्था है। बीएचयू अस्पताल में भी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संक्रमित लोगों की नियमित काउंसिलिंग की जाती है और उन्हें समय पर दवाइयां लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। एचआईवी की पुष्टि होने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही इलाज और नियमित दवाओं की मदद से एचआईवी के साथ भी लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
बचाव के लिए नशीले पदार्थों से दूर रहें, कभी भी सिरिंज साझा न करें, सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं और टैटू बनवाते समय नई, स्टेराइल सुई का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। संक्रमण का शक होने पर जांच कराने में देरी न करें। एचआईवी से बचाव की शुरुआत सही जानकारी से होती है। किशोरों और युवाओं को डराने या दोष देने के बजाय उन्हें बीमारी, सुरक्षित व्यवहार और समय पर इलाज के बारे में सरल भाषा में समझाना जरूरी है।