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ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को रेलवे बोर्ड से NOC, 7.5 किमी रूट पर बनेंगे 5 नए स्टेशन
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
- sakshi choudhary
- 18 Jun, 2026
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को रेलवे बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिल गया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर नोएडा के सेक्टर-51 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्थित गौर चौक (किसान चौक) तक जाएगा। लगभग 7.5 किलोमीटर लंबे इस नए मेट्रो रूट का उद्देश्य क्षेत्र की बढ़ती आबादी को बेहतर और तेज सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद अब स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि परियोजना जल्द ही निर्माण चरण में प्रवेश करेगी।
नई योजना के अनुसार इस मेट्रो कॉरिडोर पर कुल पांच स्टेशन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित स्टेशन सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और सेक्टर-4 (गौर चौक/किसान चौक) में बनाए जाएंगे। इससे पहले मेट्रो परियोजना का प्रारंभिक प्रस्ताव 17.4 किलोमीटर लंबा था, जिसमें 11 स्टेशन शामिल थे। हालांकि, नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के साथ तकनीकी और संरचनात्मक टकराव की आशंका को देखते हुए परियोजना के डिजाइन और रूट में बदलाव किया गया। संशोधित योजना के तहत कॉरिडोर की लंबाई कम की गई और स्टेशनों की संख्या भी घटाई गई, ताकि परियोजना को अधिक व्यावहारिक और तकनीकी रूप से सुगम बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य में निर्माण और संचालन से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद करेगा।
हालांकि रेलवे बोर्ड से NOC मिलना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अभी भी संशोधित डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की स्वीकृति और अन्य सरकारी मंजूरियां मिलना बाकी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। मेट्रो परियोजना के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट, नोएडा और दिल्ली के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा। साथ ही, सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। क्षेत्र के रियल एस्टेट, व्यापारिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विकास को भी इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, जिससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।