Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Delhi Weather Update: दिल्ली में मानसून की एंट्री में देरी, जुलाई के पहले सप्ताह तक पहुंचने के आसार

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इस बार मानसून के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सामान्य तौर पर 27 जून के आसपास राजधानी में पहुंचने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे प्रमुख कारण बंगाल की खाड़ी में आवश्यक मौसम प्रणालियों का समय पर विकसित न होना है।
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दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इस बार मानसून के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सामान्य तौर पर 27 जून के आसपास राजधानी में पहुंचने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे प्रमुख कारण बंगाल की खाड़ी में आवश्यक मौसम प्रणालियों का समय पर विकसित न होना है। आईएमडी के वैज्ञानिक कृष्णा मिश्रा के अनुसार, हर साल जून के मध्य में बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो नमी से भरी हवाओं को उत्तर-पश्चिम भारत की ओर खींचते हुए मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन इस वर्ष अब तक ऐसा कोई प्रभावी सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है, जिसके चलते मानसून की प्रगति प्रभावित हुई है।


मौसम विभाग के मुताबिक 25 से 26 जून के बीच बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम सक्रिय होता है तो मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और इसके बाद दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं भी फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं और दो भागों में विभाजित हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हवाओं की कमजोरी भी मानसून की धीमी चाल का एक बड़ा कारण है। मानसून को आगे बढ़ाने में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से आने वाली नमी युक्त हवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए दोनों क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियों का बनना आवश्यक माना जाता है।


देशभर में बारिश के आंकड़े भी मानसून की सुस्त रफ्तार की पुष्टि कर रहे हैं। आईएमडी के अनुसार 4 जून से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 41 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि में जहां सामान्य रूप से 72.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य भारत में 67 प्रतिशत, पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में 42 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 22 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में अनुकूल सिस्टम बनने के बाद मानसून की गति तेज होगी और जुलाई की शुरुआत से देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।