Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा में 'जीरो डिस्प्यूट विलेज' की शुरुआत, किसानों को जल्द मिलेंगे आबादी भूखंड

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों की वर्षों पुरानी जमीन संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'जीरो डिस्प्यूट विलेज' नीति पर काम शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य गांवों में लंबित भूमि विवादों का तेजी से निस्तारण कर पात्र किसानों को उनके आबादी भूखंड उपलब्ध कराना है।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों की वर्षों पुरानी जमीन संबंधी समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'जीरो डिस्प्यूट विलेज' नीति पर काम शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य गांवों में लंबित भूमि विवादों का तेजी से निस्तारण कर पात्र किसानों को उनके आबादी भूखंड उपलब्ध कराना है। इसकी शुरुआत ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सैनी और रोजा याकूबपुर गांव से की गई है। प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि इन दोनों गांवों में एक महीने के भीतर कुल 253 पात्र किसानों को आबादी भूखंड आवंटित किए जाएं। इनमें सैनी गांव के 76 और रोजा याकूबपुर के 177 किसानों को लाभ मिलेगा। सीईओ ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग तय समयसीमा में कार्य पूरा करें।


इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (ACEO) के स्तर पर होगी। सैनी गांव की जिम्मेदारी एसीईओ सुमित यादव को जबकि रोजा याकूबपुर की जिम्मेदारी एसीईओ प्रेरणा सिंह को सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को संबंधित विभागों और समितियों से आवश्यक अनुमोदन एवं संस्तुतियां समय पर प्राप्त कर पात्र किसानों को भूखंड दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। सीईओ के निर्देश के बाद एसीईओ सुमित यादव ने सैनी गांव में उस भूमि का निरीक्षण भी किया जहां आबादी भूखंड विकसित किए जाने हैं। इसके अलावा नियोजन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह दोनों गांवों के पात्र किसानों की सूची तत्काल प्रकाशित करे ताकि प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ सके। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पात्रता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि या विवाद की संभावना न रहे।


प्राधिकरण ने नियोजन विभाग को दोनों गांवों में आवश्यकतानुसार री-प्लानिंग के लिए 10 दिन का समय दिया है, जिसमें वर्क सर्किल भी तकनीकी सहयोग देगा। इसके बाद तेजी से भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो ग्रेटर नोएडा के अन्य गांवों में भी 'जीरो डिस्प्यूट विलेज' योजना लागू की जाएगी, जिससे किसानों के भूमि विवादों का स्थायी समाधान हो सकेगा। प्राधिकरण का यह कदम न केवल किसानों को राहत देगा बल्कि विकास परियोजनाओं की गति भी बढ़ाएगा और प्रशासन तथा किसानों के बीच विश्वास को मजबूत करेगा। समयबद्ध कार्ययोजना और वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी से उम्मीद है कि वर्षों से लंबित आबादी भूखंडों का इंतजार कर रहे किसानों को जल्द उनका अधिकार मिल सकेगा।

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