Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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गौतमबुद्ध नगर के सभी तालाबों और जलाशयों की एनजीटी ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, जिला प्रशासन को दिए नए निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गौतमबुद्ध नगर जिले में तालाबों और अन्य जलाशयों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन को लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत एवं संशोधित रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल नहीं थीं
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गौतमबुद्ध नगर जिले में तालाबों और अन्य जलाशयों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन को लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत एवं संशोधित रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल नहीं थीं, जिसके कारण मामले का प्रभावी परीक्षण संभव नहीं हो सका। अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि जिले के सभी तालाबों और जलाशयों का गांववार तथा संबंधित विकास प्राधिकरण के अनुसार पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए। इस रिपोर्ट में जलाशयों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण के लिए उठाए गए कदम और पुनर्जीवन की योजनाओं की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है।


यह निर्देश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मूल वाद संख्या 177/2022 अभिष्ट कुसुम गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान जारी किए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि गौतमबुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है। इसलिए जिले में मौजूद प्रत्येक तालाब और जलाशय की वास्तविक स्थिति का तथ्यात्मक आकलन किया जाना जरूरी है। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधूरी या अस्पष्ट रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों का सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, इसलिए प्रशासन को पूरी पारदर्शिता के साथ संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।


एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि गौतमबुद्ध नगर जिले का क्षेत्राधिकार तीन प्रमुख विकास प्राधिकरणों—नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA)—में विभाजित है। ऐसे में सभी प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले तालाबों और जलाशयों का अलग-अलग और गांववार विवरण देना अनिवार्य होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस निर्देश का प्रभावी तरीके से पालन किया जाता है तो जिले में अतिक्रमण, जलाशयों के खत्म होने और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन द्वारा एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली विस्तृत रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे जिले के जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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