नोएडा मजदूर आंदोलन: आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द, हाईकोर्ट के फैसले से पुलिस के आरोपों पर उठे सवाल
- sakshi choudhary
- 04 Sep, 2026
नोएडा में अप्रैल में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत रद्द कर दी है। आकृति चौधरी पर नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी में भूमिका निभाने के आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने उन्हें मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताते हुए दावा किया था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को उकसाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में भूमिका निभाई। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और उसके आधार पर लगाए गए NSA के प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने कहा है कि पुलिस हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करती है। उनके मुताबिक, अभी आदेश की प्रति पुलिस को प्राप्त नहीं हुई है और आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन कर आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
दरअसल, 13 अप्रैल को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर नोएडा में बड़े पैमाने पर श्रमिक प्रदर्शन हुआ था। पुलिस के अनुसार, इस आंदोलन में करीब 42 हजार मजदूर सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान 300 से अधिक कंपनियों के शीशे तोड़े जाने और दो दर्जन से ज्यादा वाहनों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। हिंसा और आगजनी के बाद नोएडा कमिश्नरेट के अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज किए गए और जांच शुरू हुई। इसी मामले में पुलिस ने 11 अप्रैल को आकृति चौधरी को बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद मई में उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का आरोप था कि आकृति की गतिविधियां भड़काऊ थीं और उन्होंने भीड़ को उग्र करने के साथ लोक व्यवस्था को प्रभावित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
वहीं, आकृति चौधरी के अधिवक्ता रजनीश यादव ने NSA की कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि हिरासत के लिए पुलिस के पास पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं थे। बचाव पक्ष का आरोप है कि सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी धाराओं का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा NSA हिरासत रद्द किए जाने के बाद अब पुलिस के सामने अदालत के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति तय करने की चुनौती है। नोएडा का यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि एक ओर पुलिस हिंसक श्रमिक आंदोलन में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और आगजनी के आरोपों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष NSA जैसी कड़ी कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने का दावा कर रहा है। अब हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश के सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने के पीछे अदालत ने किन कानूनी आधारों को महत्वपूर्ण माना।