UP Expressway: सभी एक्सप्रेसवे के लिए बनेगा कॉमन कमांड सेंटर, 14449 पर मिलेगी हर मदद
- sakshi choudhary
- 26 Aug, 2026
उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब हादसा होने, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों को अलग-अलग विभागों और हेल्पलाइन से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) राज्य के सभी एक्सप्रेसवे के लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए मौजूदा आपातकालीन हेल्पलाइन 14449 को इस कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत यात्री की सूचना मिलते ही संबंधित स्थानीय नियंत्रण कक्ष, एंबुलेंस, गश्ती वाहन, क्रेन, पुलिस या दमकल सेवा को जरूरत के अनुसार भेजने की प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित की जाएगी। इस हाईटेक व्यवस्था को करीब छह महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कैमरों से जाम और हादसों पर रहेगी नजर
प्रस्तावित कमांड सेंटर में एक्सप्रेसवे से जुड़ी यातायात और निगरानी संबंधी सूचनाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। यूपीडा के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए ट्रैफिक की स्थिति, जाम, वाहनों की गति, सड़क पर रुके वाहन, गलत दिशा में चलने वाले वाहन और हादसों की जानकारी हासिल की जा सकेगी। इसके अलावा एएनपीआर, गति मापने वाली प्रणालियों, मौसम और दृश्यता सेंसर से मिलने वाला डेटा भी कमांड सेंटर से जोड़ा जा सकता है। इससे एक्सप्रेसवे पर किसी घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बन सकेगा और कार्रवाई की निगरानी भी संभव होगी।
14449 पर आने वाली हर कॉल का रहेगा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था में हेल्पलाइन 14449 पर आने वाली, उठाई गई, छूटी और दोबारा आने वाली कॉल का रिकॉर्ड रखा जाएगा। कॉल करने वाले की जानकारी के साथ एक्सप्रेसवे का नाम, घटना का स्थान, यात्रा की दिशा और घटना की श्रेणी भी दर्ज की जाएगी। किसी शिकायत या आपात स्थिति के निस्तारण तक उसकी स्थिति अपडेट होती रहेगी। एंबुलेंस, गश्ती वाहन और क्रेन जैसे संसाधनों की उपलब्धता और लोकेशन भी जीपीएस के जरिए देखी जा सकेगी। इससे केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित व्यवस्था के बजाय मदद पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा सकेगी। फिलहाल एक्सप्रेसवे से जुड़ी यातायात, टोल, निगरानी और आपात सेवाओं की सूचनाएं अलग-अलग व्यवस्थाओं में उपलब्ध हैं। प्रस्तावित कॉमन कमांड सेंटर इन्हें एक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।