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भारत में E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मंजूरी का रास्ता साफ, सरकार ने बदले मोटर वाहन नियम; जानें आम कार मालिकों पर क्या होगा असर

भारत में वैकल्पिक ईंधन और कम प्रदूषण वाले वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामकीय रास्ता साफ किया है।
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भारत में वैकल्पिक ईंधन और कम प्रदूषण वाले वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामकीय रास्ता साफ किया है। इसके बाद खास तौर पर डिजाइन और प्रमाणित किए गए वाहन 100 प्रतिशत तक इथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकेंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल कारों में भी E100 ईंधन इस्तेमाल किया जा सकेगा।


मोटर वाहन नियमों में क्या बदलाव हुआ?

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसके तहत उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में E100 ईंधन को भी शामिल किया गया है। इससे पहले नियमों में E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का प्रावधान था। इस बदलाव का उद्देश्य ऐसे वाहनों के निर्माण और संचालन के लिए नियमों को स्पष्ट करना है, जिन्हें अधिक मात्रा में इथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए तैयार किया जाता है।


क्या होता है E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसी गाड़ियां होती हैं, जिन्हें पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चलने के लिए विशेष रूप से बनाया जाता है। वाहन के डिजाइन और प्रमाणन के आधार पर ये E85 या E100 जैसे ईंधन का इस्तेमाल कर सकते हैं। E100 का मतलब ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग पूरा हिस्सा इथेनॉल का होता है। इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे भारत में मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि स्रोतों से तैयार किया जाता है। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है। भारत में भी इस तकनीक को बढ़ावा देने से वाहन उद्योग को नए विकल्प मिल सकते हैं।


क्या मौजूदा पेट्रोल कार में E100 डलवा सकते हैं?

यह सवाल आम कार मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि सड़क पर चल रही हर पेट्रोल कार E100 ईंधन का इस्तेमाल कर सकती है। सामान्य पेट्रोल या E20 ईंधन के लिए बनी गाड़ियों में E85 या E100 इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जब तक निर्माता ने उस वाहन को इसके लिए उपयुक्त और प्रमाणित न किया हो। इसलिए मौजूदा कार मालिकों को अपनी गाड़ी में कोई बदलाव कराने या E100 ईंधन पर जाने की जरूरत नहीं है। वाहन में हमेशा निर्माता की ओर से अनुमोदित ईंधन का ही इस्तेमाल करना चाहिए।


E100 ईंधन से क्या फायदे हो सकते हैं?

भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से कई संभावित फायदे हो सकते हैं।

1. कच्चे तेल के आयात में कमी: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। घरेलू स्तर पर तैयार इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

2. प्रदूषण घटाने में मदद: इथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल कुछ प्रकार के प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम कर सकता है। हालांकि, वास्तविक परिणाम वाहन की तकनीक, इंजन और ईंधन की गुणवत्ता पर निर्भर करेंगे।

3. कृषि क्षेत्र को लाभ: गन्ने और अन्य उपयुक्त कृषि स्रोतों से इथेनॉल बनाने की मांग बढ़ने पर किसानों और जैव ईंधन उद्योग को अवसर मिल सकते हैं। इसके लिए पानी की उपलब्धता और फसलों के टिकाऊ इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।


क्या E100 से पेट्रोल पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। नियमों में बदलाव से E100 पर चलने वाले विशेष वाहनों के लिए रास्ता साफ हुआ है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में सभी पेट्रोल वाहन तुरंत इस ईंधन पर चलने लगेंगे। इसके लिए उपयुक्त वाहनों का निर्माण, प्रमाणन, ईंधन की उपलब्धता और जरूरी वितरण व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों से जुड़े नियमों में बदलाव भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है। इससे भविष्य में वाहन चालकों को नए विकल्प मिल सकते हैं। लेकिन आम कार मालिकों को फिलहाल अपनी गाड़ी में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात है कि वाहन के निर्माता द्वारा अनुमोदित ईंधन का ही इस्तेमाल किया जाए।