Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● राहुल गांधी की शिक्षा मुहिम! क्यों चुने गए देश के चार सबसे बड़े एजुकेशन हब? ● शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलें तेज, संजय राउत का बड़ा आरोप! सांसदों को दिए जा रहे 15 करोड़ रुपये ● नोएडा एयरपोर्ट से पहली कार्गो फ्लाइट रवाना, व्यापार और किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा ● नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कार्गो सेवा शुरू, पश्चिमी यूपी के उत्पादों को मिलेगा Global Market का सीधा रास्ता ● ग्रेटर नोएडा में अवैध कूड़ा डंपिंग पर सख्ती, जीटा वन में चार ट्रैक्टर-ट्राली पकड़ी गईं, एक लाख रुपये का जुर्माना ● राम मंदिर दान पेटिका विवाद: दूसरी बार मंदिर पहुंची SIT, पुजारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों से होगी पूछताछ ● ममता बनर्जी ने भवानीपुर हार को दी हाईकोर्ट में चुनौती, शुभेंदु अधिकारी की जीत पर उठाए सवाल ● Noida International Airport: अपनी जमीन देने वाले किसानों ने भरी पहली उड़ान, 104 वर्षीय राजवती देवी हुईं भावुक ● Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में झमाझम बारिश, गर्मी से राहत लेकिन बढ़ेगी उमस ● दिल्ली में AAP कार्यकर्ता मोहम्मद राशिद की गोली मारकर हत्या, रंगदारी विवाद में 15 राउंड फायरिंग से दहला नेहरू विहार

ग्रेटर नोएडा में मियावाकी पद्धति से बनेगा नया वन क्षेत्र, रायपुर बांगर में एक लाख पौधे लगाने की पहल

ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रायपुर बांगर के पास एक बड़े वन क्षेत्र के विकास की पहल शुरू की है।
top-news

ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रायपुर बांगर के पास एक बड़े वन क्षेत्र के विकास की पहल शुरू की है। इस परियोजना के तहत मियावाकी पद्धति से करीब एक लाख देसी पौधे लगाए जाएंगे। शनिवार को प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने पौधरोपण कर इस अभियान का शुभारंभ किया। यह पहल पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और कैच फाउंडेशन द्वारा CSR Fund के माध्यम से की जा रही है, जबकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसके लिए ग्रीन बेल्ट की जमीन उपलब्ध कराई है।


प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक उद्यान अजीत भाई पटेल ने बताया कि रायपुर बांगर के आसपास मौजूद औद्योगिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए इस ग्रीन बेल्ट को विकसित किया जा रहा है। मियावाकी पद्धति के जरिए घने और बहुस्तरीय वन विकसित किए जाते हैं, जिसमें विभिन्न स्वदेशी प्रजातियों को नजदीक लगाकर तेजी से विकसित होने वाला पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाता है। इस पद्धति का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करना, जैव विविधता को बढ़ाना और शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र का विस्तार करना है।

कैच फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष भरत सिसोदिया ने बताया कि फाउंडेशन अगले तीन वर्षों तक इस वृक्षारोपण परियोजना की देखभाल और निगरानी करेगा। इस दौरान सिंचाई, मिट्टी का पोषण, मल्चिंग, पौधों की जीवित रहने की निगरानी और आवश्यकतानुसार रिक्त स्थानों को भरने जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस की ओर से मुख्य मानव संसाधन अधिकारी सतीश कुमार सिंह, कंपनी सचिव वीना कामत और आईटी प्रमुख अनुभव राजपूत भी मौजूद रहे। यह परियोजना शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, climate adaptation और sustainable urban ecosystem को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *