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नोएडा के पर्थला चौक पर जाम से मिलेगी राहत, 84 करोड़ रुपये से बनेगा 6 लेन का अंडरपास
नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है।
- sakshi choudhary
- 23 Oct, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। पर्थला गोलचक्कर पर रोज लगने वाले ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए 6 लेन का अंडरपास बनाया जाएगा। करीब 710 मीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की डिजाइन तैयार है। इस परियोजना पर लगभग 80 से 85.50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 18 महीने का लक्ष्य रखा गया है। इस अंडरपास के बनने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद की ओर आने-जाने वाले लोगों का सफर आसान होने की उम्मीद है।
सुबह-शाम के जाम से मिलेगी राहत
पर्थला गोलचक्कर नोएडा के व्यस्त चौराहों में से एक है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। खासकर सुबह ऑफिस जाने और शाम को घर लौटने के समय लोगों को लंबे जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहनों को चौराहे पर रुक-रुककर आगे बढ़ना पड़ता है, जिससे लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। प्रस्तावित अंडरपास बनने के बाद FNG कॉरिडोर पर चलने वाले वाहनों को चौराहे के नीचे से निकलने का रास्ता मिलेगा। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होने और गाड़ियों की आवाजाही बेहतर होने की उम्मीद है।
दोनों तरफ होंगी तीन-तीन लेन
इस अंडरपास में कुल छह लेन होंगी, यानी आने और जाने वाले वाहनों के लिए तीन-तीन लेन बनाई जाएंगी। इसकी लंबाई करीब 710 मीटर होगी। निर्माण के दौरान आसपास की जमीन और मौजूदा ढांचों को सुरक्षित रखने के लिए डायफ्राम वॉल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा बारिश के दिनों में अंडरपास में पानी जमा होने से बचाने के लिए दो संप वेल और पंपिंग सिस्टम लगाने की योजना है। इससे बारिश के पानी को बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
इन इलाकों के लोगों को होगा फायदा
इस परियोजना से सेक्टर-66, 71, 119, 120, 121, 122, छिजारसी, सोरखा और किसान चौक समेत आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। FNG कॉरिडोर के जरिए नोएडा की कनेक्टिविटी गाजियाबाद, NH-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से बेहतर होती है। भविष्य में फरीदाबाद की दिशा में संपर्क बढ़ने से भी इस रास्ते का महत्व और बढ़ सकता है। अंडरपास शुरू होने के बाद लोगों को कम समय में सफर पूरा करने, ईंधन बचाने और जाम की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था शुरू होने के बाद ही साफ होगा।