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● ग्रेटर नोएडा में फायर सेफ्टी पर बड़ा सवाल: बिना OC और Fire NOC के रह रहे हजारों लोग
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ग्रेटर नोएडा में फायर सेफ्टी पर बड़ा सवाल: बिना OC और Fire NOC के रह रहे हजारों लोग
दिल्ली में आग की हालिया घटना में 21 लोगों की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा की फायर सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शहर की कई ऊंची इमारतों, स्टूडियो अपार्टमेंट्स और अस्पतालों में फायर एनओसी, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
- Kapil Choudhary
- 04 Jun, 2026
देशभर में आए दिन आग लगने की बड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में दिल्ली में आग लगने की एक दर्दनाक घटना में 21 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने एक बार फिर फायर सेफ्टी व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर बड़ी दुर्घटना के बाद सिस्टम को सुधारने की बातें तो होती हैं, लेकिन समय बीतने के साथ सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाता है।
ग्रेटर नोएडा की ऊंची इमारतों में बड़ा जोखिम
ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक इमारतें मौजूद हैं। इनमें से कई इमारतों में फायर एनओसी (No Objection Certificate) नहीं है या फायर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। इसके बावजूद हजारों लोग इन भवनों में रह रहे हैं और रोजाना उनका उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
बिना ओसी और फायर एनओसी के आबाद हो रहे स्टूडियो अपार्टमेंट
शहर में कई स्टूडियो अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं ऐसी हैं जिन्हें अभी तक प्राधिकरण से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) या फायर विभाग से अंतिम एनओसी नहीं मिली है। आरोप है कि कुछ बिल्डर नियमों को दरकिनार कर लोगों को कब्जा दे रहे हैं और निवासी भी मजबूरी या जानकारी के अभाव में वहां रहने लगे हैं। सवाल यह है कि यदि भविष्य में कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। बिल्डर, प्राधिकरण या संबंधित विभागों की?
अस्पतालों में भी फायर नियमों की अनदेखी
फायर सुरक्षा को लेकर अस्पतालों की स्थिति भी चिंता का विषय है। कई अस्पतालों में बेसमेंट में ओपीडी संचालित की जा रही है, जबकि सर्विस फ्लोर पर मरीजों को भर्ती रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार बेसमेंट और सर्विस एरिया का इस प्रकार उपयोग सुरक्षा मानकों के विपरीत माना जाता है। आग लगने जैसी स्थिति में मरीजों को सुरक्षित निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फायर ब्रिगेड के लिए रास्ता तक नहीं
कई भवनों और अस्पतालों में निर्धारित सेटबैक क्षेत्र अतिक्रमण या पार्किंग के कारण बाधित है। ऐसी स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भवन के नजदीक तक नहीं पहुंच पातीं। आपातकालीन परिस्थितियों में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि भवनों के चारों ओर पर्याप्त खुला क्षेत्र और फायर एक्सेस रोड सुनिश्चित करना आवश्यक है।
दुर्घटना के बाद नहीं, पहले जागने की जरूरत
फायर सुरक्षा केवल कागजी औपचारिकता नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा विषय है। प्रशासन, फायर विभाग, प्राधिकरण और बिल्डरों को संयुक्त रूप से ऐसे भवनों की जांच करनी चाहिए जहां फायर एनओसी, ओसी या अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। साथ ही निवासियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस भवन में वे रह रहे हैं, वहां सभी आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र और इंतजाम मौजूद हों।
हर हादसे के बाद जिम्मेदारियों की तलाश शुरू हो जाती है, लेकिन क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार किए बिना व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा? ग्रेटर नोएडा में हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस सवाल का जवाब प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा।
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