Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING
NEWS
● Greater Noida News: प्राधिकरण में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 6 वरिष्ठ प्रबंधकों के विभाग बदले; जानें किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी
● Petrol Diesel Price: सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स खत्म; डीजल और जेट फ्यूल पर बढ़ाई ड्यूटी
● Greater Noida News: नीमका जेल में बंद मां के 5 साल के बेटे का नर्सरी में दाखिला, स्कूल बस लेने आएगी जेल तक
● Noida News: पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने किए 6 पुलिसकर्मियों के तबादले, सेक्टर-63, 49 और फेस-3 थाने को मिले नए प्रभारी
● पीलीभीत वोटर लिस्ट विवाद: दोनों हटाए गए SDM की लखनऊ में तैनाती रद्द, शासन ने प्रतीक्षारत किया
● काशी को मिली तीन नई ट्रेन सेवाओं की सौगात, दिल्ली के लिए दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर; गाजियाबाद और अलीगढ़ में भी होगा ठहराव
● दिल्ली-NCR में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक, प्रदूषण के बढ़ते खतरे के बीच केंद्र का बड़ा फैसला
● भूटान में ग्लेशियर झील फटने से आई बाढ़, भारत में अलर्ट: आखिर क्या होता है GLOF, हिमालय में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
● यूपी दौरे पर अमित शाह को अखिलेश यादव का तंज, बोले- 'बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते', दिल्ली रैली में भी होंगे शामिल
● पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में धूमधाम से मना दिवाली उत्सव, रंगोली-डांस और दीया सजावट प्रतियोगिताओं ने मोहा मन
ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों को सीवर लाइन से जोड़ने का मामला, परियोजना विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रेटर नोएडा के वैदपुरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को नियमों के विपरीत प्राधिकरण की सीवर लाइन से जोड़ने का मामला सामने आया है।
- sakshi choudhary
- 22 May, 2026
ग्रेटर नोएडा के वैदपुरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को नियमों के विपरीत प्राधिकरण की सीवर लाइन से जोड़ने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार खसरा संख्या 207, 61, 252, 253, 249 और 250 पर विकसित कई अवैध कॉलोनियों को फरवरी और मार्च के दौरान चुपचाप तरीके से सीवर नेटवर्क से जोड़ा गया। यह पूरा क्षेत्र वर्क सर्किल-2 के अंतर्गत आता है। मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों ने कुछ सोसाइटियों में अवैध रूप से डाली गई सीवर लाइन को तोड़ने की कार्रवाई की, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अभी भी कई कॉलोनियां नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कॉलोनियों को सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं देकर अप्रत्यक्ष संरक्षण भी दिया जा रहा है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। क्षेत्र में कॉलोनी विकसित करने वाले बिल्डर लोगों को यह भरोसा भी दे रहे हैं कि उनकी सोसाइटी को प्राधिकरण की सुविधाओं से जोड़ दिया जाएगा, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि कुछ माह पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह ने नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) और निबंधन विभाग को पत्र लिखकर अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। एनपीसीएल से अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन न देने और निबंधन विभाग से फेस-1 के 124 तथा फेस-2 के 140 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री केवल खसरा-खतौनी में दर्ज उपयोग श्रेणी के अनुसार करने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद परियोजना विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित लापरवाही के चलते अवैध कॉलोनियों को सुविधाएं मिलने से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।